युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के महानगर संयोजक अनुज मित्तल ने कहा कि सरकारी परिसंपत्तियों को लीज पर देने के सरकार के फैसले पर राहुल गांधी का बयान तथ्यहीन, भ्रामक और झूठा है। सरकार ने इन परिसंपत्तियों को बेचने का फैसला नहीं लिया है, बल्कि इनकी देखरेख और सेवाओं के लिए इन्हें लीज पर दिया है। अनुज मित्तल ने कहा कि देश में निजीकरण को बढ़ावा किसने दिया था, यह देश की जनता जानती है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि महाराष्टï्र की सरकार, जिसमें उनकी पार्टी भागीदार है, ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे की देखरेख और टोल वसूलने की जिम्मेदारी निजी हाथों में क्यों दी है। सिर्फ भ्रम फैलाने और लोगों को बरगलाने के लिए झूठ बोला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्टï कर चुकी है कि सरकारी परिसंपत्तियों को निजी हाथों में नहीं दिया जा रहा है। देश के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए ऐसी संपत्तियों को लीज पर दिया जा रहा है जिसका परिचालन निजी क्षेत्र कर सकता है। अनुज मित्तल ने कहा कि कोरोना संकट के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने उद्योग जगत को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कई घोषणाएं की। कोरोना की पहली लहर के बाद उद्योग खासकर लघु उद्योग को फिर से मजबूती देने के लिए बीस हजार करोड़ रुपए की सहायता दी गई। छोटे-छोटे काम करने वालों को व्याज मुक्त लोन दिए गए। ठेली-खोमचा लगाने वालों को बिना किसी दस्तावेज के लोन दिए गए। सरकार के प्रयासों के कारण ही कोरोना संकट के बाद अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ गई है। उन्होंने कहा कि अभीहाल ही में अमेरिका की एक रेटिंग एजेंसी ने भारत की विकास दर साढ़े सात प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने के लिए ही सरकार ने परिसंपत्तियों को लीज पर देने का फैसला लिया है। यह फैसला मनमोहन सिंह ने भी लिया था, जब वे प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री हुआ करते थे। एनटीपीसी, एलआईसी और कई नवरत्न कंपनियों के शेयर बेचने का फैसला मनमोहन सिंह ने लिया था।
अनुज मित्तल ने कहा कि प्रदेश की योगी सरकार व्यापारियों की हर मांग को गंभीरता से ले रही है। व्यापारियों ने शनिवार और रविवार को लॉकडाउन खत्म करने की मांग थी तो योगी सरकार ने इस मांग को मानते हुए व्यापारियों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में ही प्रदेश में व्यापार के लिए उपयुक्त माहौल बनता है, जिसमें व्यापारी खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। व्यापारियों का उत्पीडऩ नहीं होता है। जो भी अधिकारी उत्पीडऩ करता पाया जाता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है।