सुब्रत भट्टाचार्य
गाजियाबाद। केंद्र सरकार के तीन कृषि सुधार कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन से मोदी सरकार कितनी परेशान है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। अबतक के अपने सात साल के कार्यकाल में मोदी सरकार कभी भी किसी मसले पर इतना ज्यादा परेशान नहीं दिखी, जितना किसान आंदोलन को लेकर है। इसी साल 26 जनवरी को किसानों के दिल्ली मार्च के बाद से सरकार की परेशानी और बढ़ गई। सरकार के लिए नाक का सवाल बने कृषि कानूनों को बनाए रखने की चुनौती है जबकि अपने आंदोलन के जरिए किसान सरकार को अपनी बात मनवाने पर आमादा है। रोचक बात यह है कि अब इस आंदोलन की धुरी पंजाब के किसानों के बदले अब पश्चिम यूपी के किसान खासकर जाट किसान हो गए। ऐसे वक्त जब उत्तर प्रदेश में अगले छह माह में विधानसभा चुनाव होने हैं, किसान आंदोलन के साथ जाट समाज का खड़ा होना, सरकार और भाजपा की परेशानियों को बढ़ाने वाला है।
कृषि कानूनों को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच एक मनोवैज्ञानिक खेल चल रहा है। आंदोलनकारियों ने पिछले दिनों मुजफ्फरनगर में बड़ी महापंचायत कर सरकार और भाजपा को चुनाव से पहले संकेत दिया तो प्रदेश सरकार अब जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर अलीगढ़ में विश्वविद्यालय की नींव रखकर नहले पर दहला मार दिया। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मनोवैज्ञानिक खेल में सरकार ने तुरुप का पत्ता चल दिया। जानकारों का कहना है कि सरकार के पास अभीभी कई इक्के हैं। अभी तो सिर्फ एक ही इक्के को चलाया है। आने वाले दिनों में सरकार जाटों को रिझाने के लिए और भी कई बड़े ऐलान कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर स्मारक बनाने या उन्हें भारतरत्न से नवाजे जाने की भी सोच रही है। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते रहेंगे, सरकार अपने खाते से एक-एक कर पत्ते फेकेगी।
वहीं, जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम से बन रहे विश्वविद्यालय को लेकर जाट समाज बेहद खुश है। समाज के नेताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उनका कहना है कि यह उनके लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर बनने वाले विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। लोधा क्षेत्र में गांव मूसेपुर में राज्य सरकार का यह विश्वविद्यालय बनेगा। पास ही डिफेंस कारिडोर भी बनेगा। गाजियाबाद के प्रमुख जाट नेताओं ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को याद किया। इससे जाट समाज खुद को गौराविंत महसूस कर रहा है।
पूर्व मेयर अशु वर्मा ने कहा कि वर्षों से राजा महेंद्र प्रताप सिंह के सम्मान की लड़ाई लड़ी जा रही थी, मगर पिछली सरकारों ने जरा भी ध्यान नहीं दिया। राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने पहली आजाद हिंद सरकार अफगानिस्तान में बनाई थी। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए उन्होंने 1911 में अपनी जमीन दे दी। लेकिन पूर्व की सरकारों ने उनके योगदान को सम्मान नहीं दिया। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह को सम्मान देकर पूरे जाट समाज को सम्मानित किया।
जाट नेता राजा वर्मा का कहना है कि जाट समाज के लिए अगर किसी दल ने कुछ किया है तो वह भाजपा ही है। पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह के कर्मस्थली रमाला में शुगर मिल की कैपसिटी भाजपा सरकार ने ही 25 हजार कुंतल से 50 हजार कुतंल की थी। पूर्व सरकारों ने राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर एक पत्थर तक नहीं लगाया। कांग्रेस की पूर्व सरकार ने कम्यूनिस्टों के दबाव में राजा सूरजमल को लुटेरे के रूप में प्रचारित किया। भाजपा ने उनके वंशज राजा गरुड़ध्वज को जिला पंचायत का चुनाव लड़वाया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के पश्चिम उत्तर प्रदेश में बड़े मायने भी हैं। जाट आंदोलन इसी क्षेत्र में है।