सुरेश चौधरी
नोएडा (युग करवट)। गौतम बुद्ध नगर के नोएडा विधानसभा सीट पर खासा प्रभाव रखने वाले पूर्वांचल, बिहार व उत्तराखंड के मतदाता भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए कोई मायने नहीं रखते। आलम यह है कि नोएडा विधानसभा सीट पर मतदाताओं की स्थिति की जो सूची तैयार कर लखनऊ भेजी गई है, उसमें इन जगह के निवासियो का कोई जिक्र तक नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नोएडा महानगर भाजपा द्वारा भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय लखनऊ में भेजी गई चुनाव प्रबंधन रिपोर्ट में यहां पर मतदाताओं का आकलन इस प्रकार किया गया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार भेजी गई रिपोर्ट में जाटव 30 हजार बाल्मीकि 15 हजार, कोरी 5,000, कुशवाहा/सैनी 5 हजार, प्रजापति 10 हजार, निषाद/केवट 2 हजार, यादव 40 हजार, ब्राह्मण 1,10,000, ठाकुर 35 हजार, वैश्य 1,35,000,कायस्थ 30,000, भूमिहार/त्यागी 15 हजार, मुस्लिम 55 हजार, कुर्मी 5 हजार, जाट 8 हजार, गुर्जर 35 हजार, लोधी 5 हजार, पंजाबी 35 हजार, उडिय़ा 25 हजार,बंगाली 30 हजार दक्षिण भारतीय 25 हजार तथा अन्य 20 हजार की संख्या बतायी गयी है। कुल 6,75,000 वोटरों की संख्या भाजपा मुख्यालय पर दी गई है। बताया जाता है कि यहां पर करीब ढाई लाख से ज्यादा पूर्वांचल व बिहार व उत्तराखंड के वोटर रहते हैं। इनकी संख्या नोएडा विधानसभा में करीब 30 प्रतिशत है। लेकिन सूची मे इनका कहीं पर जिक्र नहीं किया गया है। इस बात को लेकर पूर्वांचल व बिहार के लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि यहां के ज्यादातर लोग भाजपा को वोट देते हैं। लेकिन भाजपा नेताओं की नजर में उनकी कोई इज्जत नहीं है। यहां के सेक्टरों गांवों तथा सोसायटियो में पूर्वांचल, बिहार व उत्तराखंड के लोग भारी संख्या में निवास करते हैं। इनकी संख्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि छठ व्रत व होली मिलन पर पूर्वांचल के लोग यहां पर लाखों की संख्या में एकत्रित होकर कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
नोएडा विधानसभा क्षेत्र के विधायक पंकज सिंह भी पूर्वांचल से सरोकार रखते हैं। भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा की ससुराल भी पूर्वांचल के वाराणसी में है। जिसकी वजह से लाखों की संख्या में पूर्वांचल के लोग उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़े हैं। इसके बावजूद भी पूर्वांचल, बिहार व उत्तराखंड के वोटरों का नाम भाजपा की सूची में शामिल ना होना यहां के नेताओं के चुनाव प्रबंधन पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि हिंदू पंजाबी/सिख मतदाताओं की संख्या भी यहां पर 80 हजार से ज्यादा है। लेकिन उनकी संख्या भी कम दिखाई गई है। सूत्रों का दावा है कि कुछ विशेषकर जातियों की संख्या यहां पर ज्यादा दिखाई गई है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में उसका आधार बनाकर, उस जाति के लोगों द्वारा यहां पर विधानसभा का टिकट मांगा जा सके।