युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। कोरोना के संकट में जब लोगों की मदद के लिए केंद्र और राज्य सरकार आम लोगों की मदद के लिए आगे आ रही है। उस समय हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत का इजाफा क्या बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा है। जिस तरह से निगम बोर्ड की बैठक में भाजपा के जन प्रतिनिधियों का नाम लिया गया उससे तो यहीं लगता हैै।
दरअसल बोर्ड की बैठक से ठीक पहले प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री अतुल गर्ग ने सियासी दांव चला। उन्होंने हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत का इजाफा नहीं करने के लिए मेयर आशा शर्मा को पत्र लिखा। ऐसे में लग रहा था कि हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत वृद्घि टल जाएगी। मगर सदन में हाउस टैक्स बढ़ाने का फैसला कर बीजेपी सदस्यों ने जनता के जले पर नमक छिड़कने जैसा किया है। मगर क्या इसका कोई असर विधान सभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों के कैंपेन पर पड़ेगा।
इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। मगर टैक्स बढ़ोत्तरी पर चर्चा के दौरान बीजेपी पार्षद दल नेता राजेन्द्र त्यागी ने सदन में जन प्रतिनिधियों पर टिप्पणी की उससे इस पर यकीन होता है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन बाद ही बीजेपी के जन प्रतिनिधियों को विधान सभा चुनाव के लिए वोट मांगने के लिए जनता के बीच जाना है। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि अब नगर निगम और शहर का हित भूल जाए। अगर निगम के पास पैसा नहीं होगा तो शहर में विकास कैसे होगा। ऐसे में जनहित में टैक्स बढ़ाया जाना अनिवार्य है। इसके बाद भाजपा के दो पार्षद हिमांशु लव और हिमांशु मित्तल को छोड़ भाजपा के तमाम पार्षद हाउस टैक्स बढ़ाने के समर्थन में खड़े हो गए।
इस दौरान बीएसपी, एसपी के पार्षदों ने भी विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा। कांग्रेसी पार्षदों ने इसका जरूर विरोध किया। हिन्दी भवन को लेकर भाजपा के नेता की एक ग्रुप हाउसिंग में करीब 30 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन और नेहरूनगर सरस्वती शिशु मंदिर में सरकारी जमीन पर निर्माण आदि को लेकर बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने मसले उठाकर एक जनप्रतिनिधि को पहले ही निशाना बनाया था। माना जा रहा है कि जन प्रतिनिधियों की टेंशन बढ़ाने के लिए टैक्स बढ़ाने का यह फैसला इस वक्त लिया जाना माना जा रहा है।

टैक्स में वृद्घि पर अब भाजपा महानगर अध्यक्ष ने लिया यू-टर्न
गाजियाबाद। हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत की वृद्घि के मामले में बीजेपी संगठन भी बुरी तरह से घिर गया है। इसी के चलते बीजेपी महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने टैक्स वृद्घि को संगठन का मसला मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यह मामला नगर निगम सदन के दायरे में आता है। इसमें जो भी फैसला लिया गया वह मेयर और निगम सदन ने लिया है। इससे बीजेपी संगठन का कोई मतलब नहीं है। गत दिनों बीजेपी महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने एक बयान जारी किया था। इसमें कहा था कि शहर की जनता पर हाउस टैक्स में वृद्घि कर बौझ डालने का यह ठीक समय नहीं है। इसके बाद ही महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की कोशिश के बाद जनप्रतिनिधियों की बैठक मेयर आशा शर्मा से कराई गई थी। बैठक में मंत्री अतुल गर्ग, विधायक संजीव शर्मा और विधायक अजिपाल त्यागी आदि मौजूद रहे। जनप्रतिनिधि भी नहीं चाहते थे कि टैक्स बढ़े। बाद में मामला प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना तक भी पहुंचा। बावजूद इसके सदन में बीजेपी पार्षदों की कोशिश से टैक्स में वृद्घि का प्रस्ताव पास हो गया। इसके बाद अब बीजेपी महानगर अध्यक्ष ने भी यू-टर्न ले लिया। उनका कहना है कि टैक्स वृद्घि से संगठन से कोई लेना देना नहीं है।

भाजपा ने गुंडागर्दी के बूते पर बढ़ाया टैक्स: चौधरी

गाजियाबाद। निगम में हाउस टैक्स के मसले पर बीएसपी के अधिकतर पार्षद चुप्पी साधे रहे। बोर्ड की बैठक में टैक्स में वृद्घि का प्रस्ताव पास होने के बाद अब बीएसपी पार्षद दल नेता आनंद चौधरी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने गुंडागर्दी के बूते पर सदन में हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत वृद्घि का प्रस्ताव पास कराने का काम किया है।
उनका कहना है कि बीएसपी का प्लान था कि शहर की जनता पर कोरोना के संकट के दौरान हाउस टैक्स का बौझ नहीं बढऩा चाहिए। कंाग्रेस और विपक्षी पार्षदों ने इसका विरोध किया तो बीजेपी के पार्षद सदन में ही धमकाने पर उतारू हो गए। बीजेपी का सदन में बहुमत है और गुंडागर्दी के बूते पर टैक्स बढ़ा दिया। जनता बीजेपी को माफ नहीं करेगी।