विशेष संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। कल प्रबुद्घ सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसे यूपी के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया। कई दिन से सम्मेलन को लेकर तैयारियां की जा रही थीं। हालांकि कार्यक्रम को सरकारी बताया जा रहा था, लेकिन कल जो तस्वीर थी उसमें मंच का संचालन महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने भी किया।
हालांकि, सरकारी पास जारी किये गये थे। इसमें अलग-अलग कैटेगरी के पास थे। ए, बी, सी और ए-प्लस। ए-प्लस का मतलब जैसे हवाई यात्रा में बिजनेस क्लास। सबसे अलग, सबसे अहम। जिस व्यक्ति को भी यह पास मिला वह अपने आपको सबसे अलग महसूस कर रहा था और उसे बिल्कुल अलग से ही जाने का रास्ता भी दिया गया था। किसी को कोई परेशानी भी नहीं हुई, लेकिन इस ए-प्लस वाले पास की गैलरी में कई पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। जो पूरे कार्यक्रम में अपना दर्द बयां करते रहे। उनका दर्द यही था कि उनको मंच नहीं मिला।
चार बार के सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर, पूर्व विधायक प्रशांत चौधरी, पूर्व विधायक कृष्णवीर सिरोही, पूर्व विधायक रूप चौधरी, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री अशोक गोयल, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बलदेवराज शर्मा एवं भाजपा के कई बड़े दिग्गज इस गैलरी में बैठे थे, लेकिन सबकी अपनी-अपनी पीड़ा थी। इतना ही नहीं कार्यक्रम के संयोजक पृथ्वी सिंह भी मंच के बजाए इसी गैलरी में बैठे थे। वैसे कार्यक्रम के संयोजक को मंच पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पूर्व विधायक रूप चौधरी को भी इस सम्मेलन की अहम जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वह भी ए-प्लस पासधारकों के साथ ही गैलरी में मौजूद थे। एक और दर्जा प्राप्त मंत्री जगदीश साधना भी भाजपा के वरिष्ठ नेता हातम सिंह नागर के साथ पहली पंक्ति में बैठे थे।
भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष पूनम कौशिक भी यहीं थीं। डॉ. वीरेश्वर त्यागी, बृजपाल तेवतिया, पुष्पेंद्र रावत, विजय मोहन, राजेंद्र त्यागी, विरेंद्र त्यागी, विभू बंसल, गौरव गर्ग जैसे बड़े नाम भी इसी गैलरी में मौजूद थे। लेकिन, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक बिजनेस क्लास वाला पास मिलने के बाद भी खुद को असहज महसूस कर रहे थे।
हालांकि, भाजपा के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने मंच से कई लोगों के नाम लेकर उनको अहमियत जरूर दी, लेकिन मंच पर रहने वाले लोग अगर नीचे बैठेंगे तो पीड़ा होना स्वभाविक ही है। कार्यक्रम सरकारी था और मामला मुख्यमंत्री की सुरक्षा से भी जुड़ा था, मगर नेताओं को तो मंच ही चाहिए है और ऐसे मौके पर भी यदि वे मंच पर होते तो पब्लिक में एक अलग संदेश जाता। जिन-जिन के नाम मंच से लिये जा रहे थे और उनको मंच पर बुलाया जा रहा था, उतना ही उन नेताओं का खून भी खौल रहा था। कई नेताओं ने कहा कि इस बारे में हाईकमान से बात करेंगे। बहरहाल कार्यक्रम समंन्न हो गया, सफल हो गया, समय निकल गया, अब क्या होगा और किसकी शिकायत होगी ये तो दूर की बात है।