इन दिनों कविनगर थाने में तैनात एक महिला दरोगा बहुत चर्चा में है। दरोगा का नाम है प्रीति गर्ग। सुनने में आया है कि जिस भी केस की ये जांच अधिकारी बन जाती हैं उस केस के वादी खून के आंसू रोते हैं। अभी हाल ही का एक मामला देख लीजिए। कनिगर थाने में २६ जून २०२२ को एफआईआर संख्या ०८१२/२०२२ दर्ज की गई थी। इसमें देवांशी चौधरी ने अपने अपने पति गौरव, ससुर विपिन, सास प्रतिभा के खिलाफ आरोप लगाए थे। पुलिस ने धारा ४९८ए, ३५४, ३१३ और दहेज अधिनियम के ३ व ४ के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में पीडि़ता के 154 के बयान भी हो चुके हैं। इस केस की जांच प्रीति गर्ग के पास ही है। हैरानी की बात यह है कि तीन महीने होने को आए हैं मगर अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई। जबकि इसमें जबरन गर्भपात का भी आरोप है। आरोपियों की अग्रिम जमानत अदालत से खारिज भी हो चुकी है। अभी चार-पांच दिन पहले ही पीडि़ता के पिता ने एसएसपी मुनीराज जी के यहां गुहार लगाई थी। बताते हैं कि एसएसपी ने तत्काल आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश जांच अधिकारी प्रीति गर्ग को दिए थे। मगर जांच अधिकारी प्रीति गर्ग ने एसएसपी के निर्देंश को भी अनसुना कर दिया। प्रीति गर्ग के बारे में ऐसी शिकायतें पहले भी सुनने आईं थीं। देवांशी चौधरी का कहना है कि प्रीति गर्ग महिला होने के बाद भी महिला को न्याय नहीं दिला रहीं हैं, वह आरोपी की मदद कर रही हैं। देवांशी का तो यहां तक कहना है कि जांच अधिकारी उस पर ही केस वापस लेने का दबाव बना रही हैं। सवाल एससएसपी मुनीराज जी से है कि आखिर देवांशी की गलती क्या है? क्यों वह थाने और पुलिस आफिस के चक्कर काटने को मजबूर है। क्यों उस पर अत्याचार करने वाले, उसका जबरन गर्भपात कराने वाले आरोपी मजे से अपने घर पर हैं? क्यों पुलिस पीडि़त महिला पर केस वापस लेने का दबाव बना रही है? क्यों, मुनीराज जी क्यों? आखिर एक दरोगा एसएसपी की बात नहीं मान रही ऐसा क्यों। यही है आपकी कानून व्यस्वथा?