नोएडा (युगकरवट)। जानलेवा बीमारी ब्लैक फंगस का खतरा अब गौतम बुद्ध नगर पर भी मंडराने लगा है। यहां के कुछ निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस से पीडि़त मरीज उपचार के लिए भर्ती हुए हैं। वही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक ओहरी ने बताया कि अभी तक आधिकारिक रूप से जनपद मे ब्लैक फंगस वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।
कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ प्रबंधक वी बी जोशी ने बताया कि बरौला गांव के रहने वाले मांगेराम शर्मा को 3 दिन पूर्व उपचार के लिए सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके अंदर ब्लैक फंगस वायरस की पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मांगेराम शर्मा कोविड से संक्रमित थे। उनका उपचार सेक्टर 39 स्थित कोविड-19 अस्पताल में चल रहा था, जहां करीब 10 दिन तक उनका उपचार चला। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद उन्हें ब्लैक फंगस बीमारी हो गई। मरीज की आंखें धंस रही थी, और उन्हें ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। उन्होंने बताया कि मांगेराम शर्मा के परिजनों ने उन्हें मेरठ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां भी उनकी हालत गंभीर बनी रही। उन्होंने बताया कि 3 दिन पूर्व मरीज को सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि डॉ उनका उपचार कर रहे हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भी ब्लैक फंगस से पीडि़त कुछ मरीजों के भर्ती होने की चर्चा है। शुक्रवार को जनपद में चर्चा चली कि एक मरीज की ब्लैक फंगस के संक्रमण की वजह से मौत हो गई है। इस बाबत पूछने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक ओहरी ने बताया कि ब्लैक फंगस वायरस की सूचना स्वास्थ्य विभाग के पास अभी नहीं है। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की इस वायरस से मौत नहीं हुई है।
सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ब्लैक फंगस वायरस की सूचना पर इसकी पड़ताल कर रहा है। वही विश्वस्तरीय मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ जीसी वैष्णव ने बताया कि इस बीमारी का पूरा नाम रायनो सेरीब्रल म्यूकोरमायकोसिस है। यह संक्रमण गंभीर स्थिति में हड्डी तक को गला देता है। कोरोना वायरस से पहले भी इसके कम मामले आते थे। कोविड-19 के गंभीर मरीज की वजह से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिसे डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की ब्लड शुगर लेवल काफी बढ़ जाता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से, हवा में मौजूद यह संक्रमण नाक के जरिए शरीर पर हमला करते हैं।