प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद। निगम बोर्ड की बैठक में मामला उठने के बाद भी नगर निगम अंतिम क्रेता से ही नामांत्रण का पूर्व में हुई रजिस्ट्री को जोडक़र शुल्क लिया जा रहा है। इस मामले में नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ0 संजीव सिन्हा का कहना है कि वह इस मामले में अभी कुछ नहीं कह सकते है।
नगर निगम में नामांत्रण को लेकर पहले एक कॉमन पॉलिसी थी। जो भी नामांत्रण कराएगा उन्हें क्रेता द्वारा प्रॉपर्टी खरीद के दौरान लगाए गए स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत पैसा नगर निगम के एकाउंट में जमा कराना होगा। इसके बाद ही के्रता के नाम प्रॉपर्टी को दर्ज कराया जाएगा। निगम ने गत दिनों इस नियम में बदलाव कर दिया। इसी क्रम में नगर निगम ने तय किया कि अगर किसी ने पहले नामांतरण नहीं कराया है। ऐसे मामले में प्रॉपर्टी के अंतिम क्रेता से पूर्व में हुई रजिस्ट्री में लगे स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत हुई सभी रजिस्ट्री का पैसा लिया जाएगा।
सात जून को हुई निगम बोर्ड की बैठक में यह मामला उठाया गया था। इस प्रकरण में पार्षद हिमांशु मित्तल ने कहा था कि जब यह प्रस्ताव बोर्ड से पास ही नहीं है तो फिर कैसे नगर निगम ने इसे लागू कर दिया। नगर निगम ने सदन में इसका कोई भी उत्तर नहीं दिया है। नगर आयुक्त का कहना था कि वह इस मामले की जांच करा रहे है। जांच इस बात की होगी कि नई और पुरानी पॉलिसी से कितना फायदा और नुकसान निगम को है। मगर सदन में प्रकरण के उठने के बाद भी इस पर निगम अब कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।