प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम बोर्ड ने जिस प्रस्ताव को 15 अक्टूबर को हुई बैठक में खारिज कर दिया था उसके संबंध में अभी तक भी नए निर्देश जोनल कार्यालय तक नहीं भेजे गए है। ऐसे में नगर निगम की कई जोन में प्रॉपर्टी के नामांतरण के नाम पर अवैध वसूली चल रही है। बीच में खरीद करने के बाद अभी अगर नामांतरण नहीं कराया तो उनसे भी नगर निगम उसमें लगे स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत पैसा वसूल कर रहा है। नगर निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी में नामांतरण को लेकर नई पॉलिसी लागू की थी जिसमें कहा गया था अगर किसी ने प्रॉपर्टी खरीदी है, लेकिन बीच में तीन बार अन्य लोगों द्वारा खरीदी गई इस प्रॉपर्टी का नामांतरण नहीं कराया तो अंतिम आवेदक को सभी रजिस्ट्री में लगे स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत रूपया नगर निगम में देकर नामांतरण शुल्क कराना होगा।
इस प्रकरण में 15 अक्टूबर को हुई बोर्ड की बैठक में विरोध किया गया था। कई सदस्यों का कहना था कि नामांतरण शुल्क के नाम पर रजिस्ट्री के दौरान दो प्रतिशत स्टांप शुल्क लिया जाता है। इसके बाद स्टांप शुल्क के हिसाब से नामांतरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में पास कर दिया गया। बोर्ड के नए फैसले के हिसाब से भले ही किसी ने खरीद के बार नामांतरण नहीं कराया, मगर वह नामांतरण के लिए एक बार खरीदी गई प्रॉपर्टी में लगे स्टांप शुल्क का एक प्रतिशत पैसा अदा करना होगा। हाल ही में पता चला कि बोर्ड की बैठक में जो प्रस्ताव पास हुआ उसके नगर निगम प्रशासन की ओर से लागू नहीं किया गया है। यही कारण है कि बोर्ड के नए प्रस्ताव के खिलाफ जाकर नामांतरण के नाम पर अवैध वसूली चल रही है।