युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढऩे के साथ ही बड़ी संख्या में मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया था। आलम यह था कि श्मशान घाट में कोविड संक्रमित शवों की चिताएं लगातार धधक रही थीं। लोगों को अपनों का दाह संस्कार कराने के लिए टोकन लेने के बाद भी छह से दस घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा था। लेकिन जिले में संक्रमण की दर घटने के साथ ही मौतों की संख्या भी कम हो रही है जिसका असर हिंडन स्थित मोक्षस्थली पर दिखाई देने लगा है। दाह संस्कार के लिए लगने वाली लंबी लाइनें पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। अधिकतर प्लेटफॉर्म खाली हो चुके हैं तो वहीं कोविड संक्रमित शवों के लिए बनाए गए अलग से घाट पर शुक्रवार को सिर्फ एक शव का दाह संस्कार किया गया।
बता दें कि अप्रैल में गाजियाबाद सहित दिल्ली, नोएडा, मेरठ तक में कोरोना संक्रमण ने तांडव मचाना शुरू कर दिया था। संक्रमण के साथ होने वाली मौतों की संख्या इतनी अधिक बढ़ गई थी कि लोगों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट में जगह तक नहीं मिल पा रही थी। दिल्ली से लेकर नोएडा में भी बड़ी संख्या में लोग अपने प्रियजनों का संस्कार कराने के लिए हिंडन घाट पहुंचना शुरू हो गए थे। तो वहीं गाजियबााद में भी हर दिन १५ से २० लोग संक्रमण के कारण दम तोड़ रहे थे। शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले हिंडन श्मशान घाट पर ही अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाए गए थे। कोविड शवों के लिए अलग से प्लेटफॉर्म बनाए गए तो वहीं इलेक्ट्रिक मशीन से भी लगातार अंतिम संस्कार किए जा रहे थे। बावजूद इसके लोगों की लाइन समाप्त होने का नाम नहीं ले रही थी। बढ़ती संख्या को देखते हुए करहेड़ा, राजनगर एक्सटेंशन, इंदिरापुरम सहित करीब पांच स्थानों पर अस्थाई श्मशान घाट बनाए गए थे। २१ अपै्रल के दिन श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए परिजन अपने प्रियजनों का शव लेकर कतार में लगे हुए थे और हर प्लेटफॉर्म पर एक चिता जल रही थी। आलम यह था कि लोग श्मशान घाट के बाहरी परिसर तक अंतिम संस्कार कराने के लिए लाइन में लगे हुए थे। उस दिन करीब २४ घंटे में ५० से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। लगातार मई तक यह सिलसिला जारी रहा और लोग अपनों के संस्कार के लिए सिफारिशों से लेकर अधिकारियों तक से गुहार लगाते दिखे। लेकिन मई माह के तीसरे सप्ताह से संक्रमण की दर में तेजी से कमी आनी शुरू हुई जिससे मौतों का सिलसिला भी कम हुआ। इतना ही नहीं पड़ोसी जिलों में भी संक्रमण से मरने वालों की संख्या में खासी कमी आई है जिसके कारण जहां अस्थाई श्मशान घाटों को बंद कर दिया गया है तो वहीं हिंडन स्थित श्मशान घाट पर भी अब स्थिति सामान्य हो गई है। यहां अब पूर्व की भांति एकाध शव ही अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं जिसमें सामान्य तरीके से हुई मौतें शामिल हैं। शुक्रवार को भी एक कोविड संक्रमित शव का अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट पर कार्यरत संस्कार कराने वाले पंडितों व स्टाफ ने बताया कि १५ दिन पहले तक हालात इस कदर खराब थे कि विधिवत संस्कार कराने में भी दिक्कतें हो रही थीं। पहली बार ऐसा नजारा था कि लगातार लोगों का अंतिम संस्कार कराना पड़ रहा था लेकिन अब स्थिति में सुधार आया है।