पिछले दिनों गाजियाबाद के हिन्दी भवन में एक कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम तो सामान्य ही था बस इसे खास बनाया एक बात ने। भाजपा से ही जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि अबकि बार अनिल अग्रवाल को सांसद बनाया जाए। पहला सवाल मेरा यह है कि आखिर इस समय अनिल अग्रवाल क्या हैं? क्या वह वर्तमान में सांसद नहीं हैं? या वह भाजपा नेता अनिल अग्रवाल को सांसद मान नहीं रहे हैं? जबकि राज्यसभा को उच्च सदन माना जाता है जिसके अग्रवाल इस समय सदस्य हैं। उसी कार्यक्रम में तो एक व्यापरी नेता यहां तक कह गए कि बहुत देख लिए बाहरी सांसद अबकि बार हमारा सांसद हमारे शहर का ही होना चाहिए। यहां दूसरा सवाल उठता है कि क्या अनिल अग्रवाल रिटायर्ड जनरल सांसद वीके सिंह को बाहरी मानते हैं? क्योंकि जब उनके सामने यह बातें कहीं गई तो अनिल अग्रवाल को उनको ऐसा कहने से रोकना चाहिए था। एक और बात बाहरी और स्थानीय की बात तो विपक्ष को करनी चाहिए, इसे भी भाजपा ही करने लगी है। जो व्यक्ति नौ साल से सांसद है जिसने राजनगर में मकान ले रखा है वह सांसद भाजपा के लोगो के लिए बाहरी कैसे हुआ, इसका जवाब संगठन को देना चाहिए। अब यदि यह सब हुआ है तो संगठन ने ऐसा करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाया है यह भी बताना चाहिए। या संगठन इसे अनुशासनहीनता नहीं मान रहा है? भाजपा के संगठन, इसके पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को भी बताना चाहिए कि क्या वो लोग अगले लोकसभा चुनाव में वाकई वीके सिंह को बदलना चाहते हैं? क्या सच में भाजपा चाहती है कि आगामी चुनाव में गाजियाबाद से प्रत्याशी बदला जाना चाहिए? यदि बदलाव चाहते हैं तो अनिल अग्रवाल ही क्यों? वह तो राज्यसभा सदस्य हैं ही। किसी और कार्यकर्ता को यह मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए। भाजपा में तमाम ऊर्जावान युवा कार्यकर्ता हैं जिनको मौका मिलना चाहिए। हालांकि मैं जानता हूं कि कोई मेरे इन सवालों का जवाब देना पसंद नहीं करेगा।