राजनीति में एक अजीब सी तस्वीर दिखाई दे रही है। जो चाह रहा है वो बोल रहा है। भले ही उसका सिर-पैर क्यों ना हो। ऐसा लगता है जैसे संसद में सवाल उठाने के पैसे लिये जाने का मामला प्रकाश में आया था। अब बयान जैसा चाहो दिलवा दो वो भी संभवत: बिकने लगा है। कांगे्रस के नेता मणिशंकर अय्यर का एक बचकाना बयान सामने आया है। चुनावी मौसम में वो पाकिस्तान की हमदर्दी कर रहे हैं। जाहिर है कि भाजपा ने इसे लपकने में देर नहीं की और अब चुनावी मंचों पर मणिशंकर अय्यर का बयान गूंज रहा है। कांगे्रस खामोश है। इस खामोशी पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। दरअसल हाशिये पर कांगे्रस के जो नेता पड़े हैं उनको कोई काम है नहीं और इस तरह की बयानबाजी करके भाजपा को जरूर मुद्दा दे रहे हैं। अब मुद्दा देने के पीछे उनका क्या लालच है ये तो वही जाने। क्या उन्हें कोई राजनीतिक लाभ मिलेगा या आर्थिक लाभ कुछ भी संभव हो सकता है। मणिशंकर अय्यर ने २०१९ में भी बीच चुनाव में इसी तरह की बयानबाजी करके भाजपा को मजबूत मुद्दा दिया था। तीसरी आंख ने देखा कि २०१९ में भी मणिशंकर अय्यर के बयान ने भाजपा को बहुमत दिलाने में अहम भूमिका रही थी। अगर ये कहा जाये कि कांगे्रस के वर्तमान या पूर्व नेता भाजपा को संजीवनी बूटी दे रहे हैं तो गलत नहीं होगा। अभी हाल ही में कांगे्रस से हटाये गये आचार्य कृष्णम् का भी बयान कम चौंकाने वाला नहीं है। उन्होंने जिस तरह न्यूज एजेंसी को दिये गये इंटरव्यू में खुलासा किया है कि राम मंदिर पर कांगे्रस फैसला बदल सकती है। उन्होंने बकायदा उस बैठक का जिक्र किया जो राहुल गांधी ने बुलाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आचार्य प्रमोद कृष्णम् का नाम लिये बगेर ही मंचों से कह रहे हैं कि कांगे्रस के एक नेता जो पार्टी में नहीं है उन्होंने बहुत बड़े खुलासे किये हैं। बहरहाल, आचार्य प्रमोद कृष्णम् एक बहुत बड़ा नाम और बड़ा चेहरा है और उनके बयान को लोग बहुत गंभीरता से लेते हैं लेकिन मणिशंकर अय्यर जैसे लोग जिनके बयान को आम लोग तो गंभीरता से नहीं लेते लेकिन चुनावी मौसम में उनके बयान जरूर एक मुद्दा बन जाते हैं। बहरहाल, पाकिस्तान की हिमायत करने वाले इस नेता के खिलाफ कांगे्रस को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और जांच भी करानी चाहिए क्या इस बयान को किसी के कहने पर दिया गया है या ये उनकी ऐसी ही मानसिकता है जो बयान में दिख रही हैै। जय हिंद