युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। मधुबन-बापूधाम कॉलोनी में करीब 800 एकड़ जमीन से प्रभावित छह गांवों के किसानों ने आज से जीडीए का घेराव शुरू कर दिया। करीब 50 ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार कई सौ की संख्या में किसान और महिलाएं जीडीए ऑफिस पहुंचे। जीडीए पर हालांकि पहले से ही पुलिस तैनात की गई थी ताकि जीडीए का गेट बंद न हो सके। मगर किसानों ने जीडीए के गेट के सामने ही अपना धरना शुरू कर दिया। किसानों ने मुख्य गेट पूरी तरह से बंद कर दिया और पुलिस देखती रह गई।
-नहीं चली प्रशासन की-मधुबन-बापूधाम कॉलोनी के लिए जीडीए ने वर्ष 2009 में 1234 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने का नोटिफिकेशन किया था। कॉलोनी के लिए छह गांवों की जमीन ली गई। इनमें गांव रईसपुर, सदरपुर, मैनापुर, बयाना और मटियाला आदि शामिल है। किसान नेता सुरदीप शर्मा का दावा है कि जीडीए ने आपसी सहमति के आधार पर किसानों से 1100 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से जमीन ली थी। लिखित में आश्वासन दिया था कि अगर योजना के किसी किसान को बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाता है तो सभी किसानों को उसका लाभ मिलेगा। कई बार धरना प्रदर्शन किए जाने के बाद भी जीडीए बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दे रहा है। किसानों ने कई दिन पहले जीडीए के घेराव की घोषणा की थी। प्रशासन ने एसडीएम सदर विनय कुमार को घेराव टालने के लिए कार्य पर लगाया था। मगर एसडीएम से किसानों की वार्ता असफल हो गई। और करीब पौन बजे बड़ी संख्या में किसानों ने जीडीए को घेरा।
-जीडीए अफसरों की टेंशन बढ़ी-किसान नेता बोस चौधरी ने बताया कि किसानों की मांग है कि सभी 800 एकड़ जमीन से प्रभावित किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाए। जीडीए जब तक इस मांग को पूरा नहीं करेगा किसानों का जीडीए पर धरना समाप्त नहीं होगा। किसानों का कहना है कि जीडीए मुआवजे के विवाद को निपटाए इसके बाद ही योजना में विकास कार्य करे। जब तक विवाद का हल नहीं होता जीडीए लिखकर दे मधुबन-बापूधाम कॉलोनी में विकास कार्य नहीं करेंगे।
-जमकर नारेबाजी-बड़ी संख्या में जीडीए पर पहुंचे किसान और मतहिलाओं ने जमकर नारेबाजी की। जीडीए के मुख्यगेट को भी किसानों ने बंद कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। इसके साथ ही किसानों ने जीडीए गेट के सामने टैंट लगा दिया। किसानों का कहना है कि इस बार मांगे माने जाने तक धरना जारी रहेगा। धरने पर बैठे किसान नेताओं में सुरदीप शर्मा, बोस चौधरी, गौरी शंकर, अमित कुमार, रणधीर सिंह, जवाहर सिंह आदि बड़ी संख्या में महिलाएं और किसान शामिल है।