बाकी कुछ हो ना हो लेकिन अब किसान आंदोलन लंबा खिंचने वाला है। हर नए दिन के साथ किसानों की कोई न कोई नई मांग उनकी लिस्ट में जुड़ती-बढ़ती जा रही है। सरकार कितनी भी लचीली क्यों ना हो जाए, मोदी जी कितना भी क्यों न झुक जाएं, किसानों की तमाम ताजा मांगों को पूरा नहीं कर सकते हैं।
किसान आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष में किसान दिल्ली बॉर्डर पर जीत का जश्न मनाएंगे, जिसमें एक लाख किसानों के शामिल होने की संभावना है। किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ शब्दों में बोल दिया है कि किसान आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा और आगे की रूपरेखा 27 नवंबर को तय होगी। किसान मोदी जी की उस बात को लेकर किसान आंदोलन को नई धार देंगे, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था एक जनवरी से किसानों की आय दुगनी हो जाएगी। एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग का खूंटा तो अभी गढ़ा ही हुआ है।
सरकार की तरफ से तीनों कृषि कानूनों की वापसी को लेकर करीब एक साल तक बेहद अडय़िल रुख रहा। किसान आंदोलन की जैसे सरकार को परवाह ही नहीं थी। यहां तक कि करीब साढ़े सात सौ आंदोलनकारी किसान शहीद हो गए, तब भी सरकार नहीं पसीजी। अचानक ही प्रधानमंत्री को अपनी तपस्या में कमी नजर आई और उन्होंने तीनों विवादित कृषि कानून वापसी की घोषणा कर दी। अपनी हर सही गलत बात पर अडिग रहने के लिए मशहूर मोदी जी अचानक इतने विनम्र कैसे हो गए, इतना झुक कैसे गए, इसको लेकर तमाम तरह की चर्चा-चकल्लस हो रही है। मोदी जी के मुलायम होने के पीछे का वह विशेष गणित है, जिनके चलते मोदी जी को अपने समीकरण बिगड़ते दिखाई पड़ रहे हैं।
बात यह है कि 2022 की शुरुआत में पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव में, जिन्हें पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। मोदी जी का सारा ध्यान उत्तर प्रदेश पर टिका है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की जीत-हार ही 2024 में भाजपा का भविष्य तय करेगी। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 210 सीटों पर किसान ही जीत-हार का फैसला करते हैं। मोदी जी इन्हीं 210 सीटों को साधने के लिए अपनी आदत के विरुद्ध देश से माफी मांगने और तीनों काले कानून वापस लेने को तैयार हुए। लेकिन किसानों का रुख देखकर ऐसा लगता नहीं है कि मोदी जी के झुकने का बहुत ज्यादा असर उन पर पड़ा हो।
किसानों को आंदोलन के बीच में दिए गए, सत्ताधारी नेताओं के सारे बयान याद हैं। उस समय मोदी जी ने आंदोलनकारी किसानों को ‘परजीवीÓ कहा था। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा था कि भीड़ इकट्ठा करने से कानून वापस नहीं होते हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बोला था कि माओवादी विचारधारा से प्रेरित लोगों के हाथों में चला गया है आंदोलन। केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने आंदोलन के पीछे पाकिस्तान और चीन का हाथ बता दिया था। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आंदोलनकारियों को टुकड़े-टुकड़े गैंग का बताया था। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह को तस्वीरों में कई लोग किसान ही नहीं लग रहे थे। किसान सब याद रखे हुए हैं और इन सारे बयानों का उत्तर चुनावों में देने के मूड में हैं।