पूजा तेवतिया
गाजियाबाद। महंगाई यह एक ऐसा बड़ा मुद्दा है जिसकी वजह से हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। हर साल सरकार बजट वृद्घि में करती है, जिसकी वजह से आम लोगों की जेब पर बहुत असर पड़ता है। हालांकि अक्सर देखा गया है कि चुनाव के दौरान सरकार आम जनता से वादा करती है कि वह महंगाई कम करेगी वहीं दूसरी तरफ जब चुनाव जीत जाती है तो वह अपने वादे को भूल जाती है और निराशा ही मिलती है। दरअसल महंगाई का असर हर चीज पर पड़ता है। खासकर रसोई पर ज्यादा देखने को मिलता है, जिसकी वजह से गृहणियों का पूरे महीने का बजट बिगड़ जाता है। चाहें फल, सब्जी, तेल, दूध, गैस आदि हों इसका सीधा असर पड़ता है। बात रसोई तक ही नहीं होती है, महंगाई का असर पैट्रोल सीएनजी आदि पर भी पड़ता है। बहरहाल हर बार आम जनता सोचती है कि इस बार सरकार बजट में कोई राहत की सांस दिलवाएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है।
वहीं महंगाइ्र के साथ-साथ दो साल से हम कोरोना जैसी महामारी से भी जूझ रहे हैं। इस महामाररी ने न जाने कितने अपने लोगों का साथ हमसे छीन लिया। इतना ही नहीं हम अपने परिवार के सदस्यों को कांधा तक नहीं दे पाए। कोरोना महामारी के चलते कारोबार ठप्प हो गए, लोग बेरोजगार हो गए। कहीं वेतन के लाले तो कहीं आधे वेतन से परिवार को पालना पड़ा। अब हम इस बिमारी से किसी तरह बाहर निकल रहे हैं तो महंगाई ने हमें जकड़ लिया। आज नींबू कितना महंगा है, टमाटर और प्याज थाली से गायब हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वो महंगाई पर अंकुश लगाए और नए कारोबार स्थापित करे ताकि लोग अपने परिवार का पालन-पोषण अच्छी तरह कर सके।