नोएडा (युग करवट)। शहर की सरकार के चुनाव में आखिरकार क्षेत्रवाद और जातिवाद पूरी तरह से हावी रहा। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) के चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी योगेंद्र शर्मा ने अपने पैनल में शामिल अधिकतर स्थानीय पदाधिकारियों के सहयोग के साथ दोबारा जीत हासिल करते हुए एनपी सिंह पैनल को करारी शिकस्त दी। फोनरवा के चुनाव को लेकर योगेंद्र शर्मा और एनपी सिंह पैनल आमने सामने मैदान में थे। रविवार को फोनरवा की नई कार्यकारिणी के लिए हुए चुनाव ने योगेंद्र शर्मा पैनल ने दूसरी बार अपनी जीत दर्ज कराई। चुनाव के दौरान 220 मतदाताओं में से 216 लोगों ने ही मतदान किया। देर शाम आए चुनाव परिणाम के बाद योगेंद्र शर्मा पैनल को विजई घोषित किया गया। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार योगेंद्र शर्मा को 140 तथा उनके प्रतिद्वंदी एनपी सिंह को महज 76 वोट ही मिल पाए। योगेंद्र शर्मा के पूरे पैनल ने जीत दर्ज की है।
बता दें कि मूल रूप से बरौला गांव निवासी योगेंद्र शर्मा सेक्टर-45 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष हैं, और पिछली बार भी वह फोनरवा के अध्यक्ष चुने गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेक्टरों की सरकार माने जाने वाली फोनरवा के चुनाव में इस बार क्षेत्रवाद और जातिवाद पूरी तरह से हावी रहा है। फोनरवा के 220 मतदाताओं में से 54 ब्राह्मण, 24 यादव, 32 ठाकुर, 30 गुर्जर, 22 वैश्य, 12 जाट सहित अन्य जातियों के मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से आधे से ज्यादा लोग जनपद के ही स्थानीय निवासी हैं जो विभिन्न सेक्टरों में आरडब्ल्यू के पद पर आसीन हैं। चुनाव के दौरान दोनों ही पैनलों द्वारा सेक्टरों के विकास के साथ-साथ मतदाताओं से क्षेत्र और जातिवाद के नाम पर भी अंदर खाने अपील की गई। चुनाव प्रचार में स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे को भी खासा तूल दिया गया। मतदान से पूर्व स्थानीय मतदाता पूरी तरह से लामबंद हो गए थे। इसके अलावा जाति के आधार पर भी संबंधित बिरादरी के प्रबुद्ध स्थानीय लोगों ने अपनी जाति के प्रत्याशियों को जीत दिलाने की अपील की थी। योगेंद्र शर्मा की स्वच्छ छवि तथा स्थानीय होने का उन्हें चुनाव में पूरा लाभ मिला है। फोनरवा चुनाव जीते योगेंद्र शर्मा के पैनल में देवेंद्र यादव, ओपी यादव, देवेंद्र चौहान, जयपाल सिंह, अशोक शर्मा, सुशील यादव, अनिल चौहान, देवेंद्र चौहान, राजीव त्यागी, अशोक त्यागी सहित कई अन्य लोग स्थानीय हैं। योगेंद्र शर्मा तथा इनके पैनल के दर्जन भर से अधिक प्रत्याशियों के स्थानीय होने का पूरा लाभ योगेंद्र शर्मा पैनल को चुनाव में मिला है। क्षेत्रवाद व जातिवाद के अलावा चुनाव में एक स्थानीय जनप्रतिनिधि की भूमिका भी योगेंद्र शर्मा पैनल को जिताने में अहम रही है।