युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। अपनी बीस सूत्रीय मांगों को लेकर आज से डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन का दो घंटे का कार्य बहिष्कार शुरू हो गया है। सुबह के समय हुई हड़ताल के चलते मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बता दें कि अपनी मांगों को लेकर फार्मेसिस्ट ४ दिसंबर से चरणवार आंदोलन कर रहे हैं। आज से फार्मेसिस्ट दो घंटे का कार्य बहिष्कार १६ दिसंबर तक करेंगे। १७ दिसंबर से फार्मेसिस्ट पूर्ण रूप से हड़ताल पर चले जाएंगे। इस हड़ताल के कारण सुबह आठ से दस बजे तक अस्पताल में नाहीं मरीजों को दवाई का वितरण हुआ और नाहीं एंटी रैबीज सहित अन्य टीकाकरण हुआ। डॉक्टर्स से दवा लिखवाने के बाद मरीज दवाओं के लिए भटकते रहे लेकिन उन्हें दस बजे के बाद ही दवाएं मिल सकीं। दो घंटे तक मरीज हड़ताल समाप्त होने का इंतजार करते रहे।
हड़ताल के कारण एमएमजी, संयुक्त अस्पताल, जिला महिला अस्पताल सहित जिले के सभी सीएचसी-पीएसची पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। लेकिन दस बजे के बाद जब दवा वितरण शुरू हुआ तो मरीजों ने भी राहत की सांस ली। हालांकि, अब १६ दिसंबर तक यह कार्य बहिष्कार रहेगा, इसके बाद भी अगर मांगें नहीं मानी गईं तो १७ दिसंबर से मरीजों को और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.एसपी वर्मा ने बताया कि काफी समय से फार्मेसिस्ट अपनी मांगों के निस्तारण को लेकर इंतजार कर रहे थे लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में आंदोलन करना पड़ रहा है। इस आंदोलन के दौरान इमरजेंसी सेवाएं, पोस्टमार्टम सेवाओं को बाधित नहीं किया जा रहा है। फार्मेसिस्टों ने अपनी मांगों को लेकर एमएमजी परिसर में प्रदर्शन किया। फार्मेसिस्ट सवंर्ग वेतन विसंगतियों को दूर करने, एलोपैथिक चिकित्सकों की अनुपस्थिति में फार्मेसिस्टों को प्रदान किया जाना वाला प्रभार भत्ता ७५० रुपए करने, फार्मेसिस्ट का पद नाम फार्मेसी अधिकारी व चीफ फार्मेसी अधिकारी करने, सहायक निदेशक फार्मेसी का पद नाम करने, चिकित्सकों की गैर हाजिरी में चिकित्सीय कार्य कर रहे फार्मेसिस्टों को विधिक मान्यता देने, प्राथमिक उपचार के साथ सीमित उपचार लिखने की मान्यता दी जाए। प्रदर्शन करने वालों में डॉ. एसपी वर्मा, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. राम कुमार उमराव आदि फार्मेसिस्ट शामिल रहे।