…और डीएम साहब किसको बार-बार ऑफिस से देखते हैं
गाजियाबाद। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह अपने कार्यालय में बैठने के बाद लगातार बाहर की ओर से देखते हैं। वो किसको देखते हैं यह हम आपको बता रहे हैं। दरअसल अब ऐसा होता था कि जिलाधिकारी के कार्यालय का गेट बंद रहता था और पता ही नहीं चलता था कि डीएम साहब हैं या नहीं। अब जब से राकेश सिंह आये हैं उन्होंने अपने कार्यालय का गेट खुलवा दिया है और वो बार-बार बाहर देखते हैं और मालूम करते हैं कि क्या कोई समस्या लेकर मिलने तो नहीं आया है और क्या बदला है डीएम आरके सिंह के आने के बाद पढ़े।

युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। किसी भी जिले के मुखिया यानि जिलाधिकारी पर जिम्मेदारियों का सबसे अधिक दबाव रहता है। जिले में विकास योजनाओं से लेकर निर्माण कार्य, आमजन को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की भी जिम्मेदारी रहती है। इसके अलावा एक और सबसे बड़ी जिम्मेदारी रहती है, जिला मुख्यालय में पहुंचने वाले फरियादियों की शिकायतें सुनने की। लेकिन जिले के आला अधिकारी से मिलने में अक्सर फरियादियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार अधीनस्थ अधिकारियों को अपनी शिकायत देनी पड़ती है या फिर निराश ही वापस लौटना पड़ता है। लेकिन इस मामले में गाजियाबाद के नवनियुक्त डीएम आरके सिंह का अदंाज़ कुछ अलग ही है। उनके इस अलग अंदाज़ का नतीजा ही है कि जिला मुख्यालय में सुबह से ही लोग अपनी शिकायतों को सुनाने के लिए पहुंच जाते हैं। ज्यादातर अधिकारी अपने कार्यालयों का गेट बंद रखते हैं जिसकी वजह से कई बार बिना वजह ही लोगों को घंटों तक खड़ा रहना पडता है। लेकिन डीएम आरके सिंह जब से गाजियाबाद में आए हैं, उन्होंने इस परंपरा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। वह शायद पहले ऐसे डीएम हैं जिनके कक्ष का दरवाजा आम लोगों के लिए पूरी तरह से खुला रहता है। इतना ही नहीं, आम ही नहीं बल्कि खास व्यक्ति भी इसी गेट से उनके कमरे में प्रवेश कर पाते हैं। डीएम आरके सिंह ने अपनी ज्वॉइनिंग के बाद ही इस आम और खास गेट की परंपरा को एक तरह से समाप्त ही कर दिया है। यानि जब तक डीएम आरके सिंह अपने कक्ष में उपस्थित रहते हैं, तब तक उनके कार्यालय का गेट खुला रहता है। डीएम के गेट के सामने फरियादियों की लाइन लग जाती है, उसके बाद क्रमवार फरियादियों को पुलिस जवान द्वारा अंदर भेजा जाता है। एक बार में तीन से चार फरियादियों को भेजा जाता है, पहले उन्हें डीएम कक्ष में रखी कुर्सियों पर बैठा दिया जाता है। इसके बाद एक के बाद एक फारियादियों की शिकायत को सुना जाता है। लोगों से शिकायती पत्र लेने के बाद तत्काल डीएम द्वारा उन सभी को कंप्यूटर पर दर्ज कराया जाता है जिसका मैसेज तत्काल फरियादी के मोबाइल पर भेजा जाता है। जिन शिकायतों का तत्काल निस्तारण नहीं होता, उन्हें संबंधित विभाग को सात दिन के अंदर निस्तारित करने के निर्देश दिए जाते हैं। खास बात यह है कि जनसुनवाई के दौरान डीएम योजनाओं को लेकर होने वाली अधिकतर बैठकों को दोपहर बाद ही लेते हैं जिसकी वजह से फरियादियों को अपनी शिकायत दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलता है। अगर किन्हीं कारणों से वह मौजूद नहीं होते, अधीनस्थ अधिकारी शिकायत सुनते हैं जिनकी शाम को डीएम समीक्षा भी करते हैं। डीएम खुद फरियादियों से मिलते हैं। डीएम के इस रैवेये और अनूठे अंदाज की फरियादी सराहना करते नहीं थकते। डीएम नियमित रूप से अपने कार्यालय में उपस्थित होकर लोगों से मिलते हैं। डीएम के कक्ष के गेट खुलने के कारण हर किसी की जुबान पर यही रहता है कि कभी भी मिलने पहुंच जाओ, डीएम साहब मिलते जरूर हैं और शिकायत भी गंभीरता से सुनते हैं। डीएम आरके सिंह के इस कदम को लेकर जिला मुख्यालय में चर्चा बनी हुई है और हर किसी की जुबान पर यही रहता है कि डीएम हो तो आरके सिंह जैसा जिनके कार्यालय के दरवाजे आम लोगों के लिए खुले हुए हैं। उनकी इसी कार्यशैली के चलते लोग बेहिचक अपनी समस्याएं बताने से भी नहीं घबराते। जिले के आम लोगों पर विश्वास जमाना किसी भी अधिकारी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता लेकिन डीएम आरके सिंह इस मामले में अपनी कार्यप्रणाली से आगे निकल चुके हैं।