युग करवट ब्यूरो
गोरखपुर। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। जीडीए की टीम प्राधिकरण के विस्तारित क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों और अवैध प्लॉटिंग को चिन्हित करने के लिए ड्रोन सर्वे कर रही है।
जीडीए के इतिहास में पहली बार ड्रोन के माध्यम से अवैध कालोनियों एवं अवैध प्लाटिंग की निगरानी कराई जा रही है। अब तक करीब 24 से अधिक कॉलोनियों की पहचान की जा चुकी है। सर्वे पूरा होने के बाद पुलिस एवं प्रशासन की सहायता से प्राधिकरण इन कॉलोनियों पर बुलडोजर चलाएगा। जीडीए की इस पहल से अवैध कॉलोनिया बसाने वाले कॉलोनाइजर्स में हडक़ंप है।
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के नेतृत्व में अभियंताओं की अलग-अलग टीमें अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को चिन्हित करने का काम कर रही हैं। ड्रोन से प्लाटिंग और कॉलोनियों की फोटो ली जा रही है और वीडियो क्लिप भी तैयार कराई जा रही है। जिन कॉलोनियों का मानचित्र जीडीए से पास नहीं होगा, उनपर कार्रवाई तय है। अवैध कॉलोनियों की सूची को जीडीए की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा, जिससे लोग उनके बारे में जान सकें।
जीडीए का सीमा विस्तार दो साल पहले किया गया था। इस समय प्राधिकरण की सीमा में 319 गांव शामिल हैं। इसके साथ ही पिपराइच, पीपीगंज व मुंडेरा बाजार नगर पंचायत भी प्राधिकरण की सीमा में है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जीडीए का विस्तार कौड़ीराम, खजनी, कैंपियरगंज तक भी करने की तैयारी है।
इसके पीछे सुनियोजित विकास की मंशा है। कार्यभार संभालने के साथ ही जीडीए के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी दशा में अवैध प्लाटिंग को पनपने नहीं दिया जाएगा। पहली बार सार्वजनिक रूप से नोटिस प्रकाशित कर आम लोगों से अवैध प्लॉटिंग में जमीन न खरीदने की अपील भी की गई थी।