युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे का दावा करने वाली प्राइवेट कंपनी के बिलों में प्लॉट का क्षेत्रफल तक ठीक नहीं है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि प्राइवेट कंपनी ने सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे नहीं कराया है। अगर सर्वे कराया होता तो मकान के कवर्ड एरिया के गुणांक में इतनी गड़बड़ी नहीं आती। यहीं कारण है कि प्राइवेट कंपनी द्वारा तैयार हाउस टैक्स के बिल अब नगर निगम प्रशासन की परेशानी का सबब बनने जा रहे हैं। निगम ने हाल ही में प्राइवेट कंपनी से पूरे शहर में प्रॉपर्टी सर्वे कराने का दावा किया है। कंपनी ने निगम से कहा कि उन्होंने सेटेलाइट इमेजिंग के जरिए शहर की प्रॉपर्टी का सर्वे किया है। मगर अब कंपनी के इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे है। जिस तरह से कंपनी द्वारा तैयार किए गए हाउस टैक्स के बिलों में गंभीर खामी मिल रही है उससे इस तरह की आशंका को बल मिल रहा है कि कंपनी ने हो सकता है कि कोई सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे नहीं कराया हो। दरअसल शहर में अब नगर निगम जो हाउस टैक्स के बिल वितरण कर रहा है उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक हाउस टैक्स के बिलों में प्रॉपर्टी का कवर्ड एरिया पूरी तरह से गलत है। कविनगर कॉलोनी में आठ ऐसे बिल मिले है जिन मकानों का कवर्ड एरिया बिलों में दस से पन्द्रह प्रतिशत तक अधिक दिखाकर हाउस टैक्स के बिल तैयार कर दिए गए है। इसी तरह से अभी तक राजनगर कॉलोनी के कई मकानों के बिलो में भी कवर्ड एरिया अधिक दिखाया गया है।