उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव रोचक और रोमांचक दौर में प्रवेश कर गया है। चुनावी सर्कस में नई-नई कलाबाजियां, नए-नए करतब देखने को मिल रहे हैं। खेल देखकर कोई आहत है, कोई चिंतित है, तो कोई खुशी के मारे तालियां बजा-बजाकर हथेलियां लाल किए जा रहा है। अलबत्ता निष्पक्ष मतदाता को खूब मजा आ रहा है, क्योंकि उसे बिन पैसे मनोरंजन का मौका जो मिल रहा है।
इस समय भारतीय जनता पार्टी की पेशानी पर परेशानी और पसीना साफ-साफ देखे जा सकते हैं। परेशानी स्वाभाविक है तमाम मंत्री और विधायक भाजपा का दामन छोडक़र भागे चले जा रहे हैं। इन भागने वालों ने भाजपा के आंगन में खिसियानी बिल्ली के नोचने को एक खंभा खड़ा कर दिया है। इस खंभे पर उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के पंजों के निशान देखे जा सकते हैं। स्वतंत्र देव सिंह ने बयान दिया है -‘जिन्हें डबल इंजन की ट्रेन में टिकट नहीं मिल रहा उन्हें ‘टीपू’ (अखिलेश यादव) अपने डग्गामार वाहन का ब्लैक में टिकट दे रहे हैं।’ स्वतंत्र देव जी का यह बयान ‘टीपू’ के पक्ष में भी एक मैसेज दे रहा है और वो यह कि सवारी ‘टीपू की डग्गामार बस’ में चढऩे को दौड़-दौड़ कर टिकट खरीद रहे हैं और वो भी ब्लैक मे, जबकि उनके पास ‘डबल इंजन की ट्रेन’ में मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध है।
बहरहाल, कोई माने या न माने, लेकिन सच्चाई यही है कि भाजपा की नींद उड़ी हुई तो है। उत्तर प्रदेश भाजपा में मची भगदड़ ने पार्टी के राजनीतिक समीकरण को बिगाड़ कर रख दिया है। अब तक जितने मंत्रियों-विधायकों ने पार्टी छोड़ी है, उनमें से अधिकांश ओबीसी हैं। …और ये सभी, एक स्वर, एक भाषा में योगी सरकार पर दलित-पिछड़ा विरोधी होने का आरोप मढ़ रहे हैं। सबने अपने त्यागपत्र में लगभग एक जैसी भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा है-‘बीजेपी की प्रदेश सरकार ने अपने 5 वर्षों के कार्यकाल में दलित, पिछड़ों, वंचितों, किसानों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तवज्जो नहीं दी और न ही उन्हें उचित सम्मान दिया।’ त्यागपत्र देने वाले मंत्रियों-विधायकों की बीजेपी की ओबीसी राजनीति का किला ध्वस्त करने की योजना स्पष्ट दिखाई दे रही है। दूसरी बात यह है भी साफ है कि अखिलेश यादव से पूरा पक्का आश्वासन मिलने के बाद ये तमाम त्यागपत्र आ रहे हैं। जो मंत्री भाजपा को अलविदा कहता है, उसी का अखिलेश के साथ फोटो ट्विटर पर तत्काल प्रकट हो जाता है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि 20 जनवरी तक रोजाना एक मंत्री भाजपा से त्यागपत्र देगा। ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए थोड़ा नहीं बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा, जिससे पार पाना असंभव नहीं तो आसान भी नहीं होगा।
लेकिन तमाम ओबीसी मंत्रियों और विधायकों का भाजपा के साथ ‘द्रोह’ एक नया और अकल्पनीय चमत्कार भी दिखा सकता है। ओबीसी के एकजुट होने की प्रतिक्रिया स्वरूप बहुसंख्यक एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। उस स्थिति में भाजपा से भागकर जाने वाले पानी के पास पहुंच कर भी प्यासे रह सकते हैं। यह भाजपा के लिए एक संभावना और भागे हुओं के लिए एक आशंका हो सकती है। वोटर का मन पलटते ही चुनाव पलटने में देर नहीं लगती है। राजनीति है और राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। बहरहाल, चुनाव के नतीजे ही खुशी और गम का फैसला करेंगे। कांग्रेस ने अपनी पहली प्रत्याशी सूची में 125 नामों की घोषणा की है। इनमें से 50 महिला प्रत्याशी हैं, जो प्रियंका के उस वादे की पूर्ति का प्रमाण है कि कांग्रेस 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देगी। प्रियंका साधुवाद की पात्र हैं, उन्होंने जो कहा कम-से-कम उसे कर तो दिखा ही। परिणाम कुछ भी हो, हार-जीत तो चुनाव का हिस्सा है। ‘लडक़ी हूं, लड़ सकती हूं’- नारा देने वाली प्रियंका ने एक नई शुरुआत तो कर ही दिखाई है। अब बाकी दलों को भी इस दिशा में सोचना पड़ेगा।