नई दिल्ली (युग करवट)। नीट और यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के चलते देश में विवाद खड़ा हो चुका है। लाखों बच्चें सरकार से न्याय की आस लगाए बैठे हैं। इस बीच यूजीसी नीट प्रवेश परीक्षा को रद्द करने के बाद अब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने सीएसआईआर-यूजीसी-नीट परीक्षा को स्थगित कर दिया। वहीं, बीती रात केंद्र सरकार भी एक्शन मोड में आ गई और उसने देशभर में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं को खत्म करने के लिए एक सख्त कानून को अधिसूचित किया। इस कानून के तहत जो लोग पेपर लीक जैसी अपराधों में शामिल लोगों उन्हें सख्त दंड दिया जाएगा, जिसमें अधिकतम 10 साल की कैद और 1 करोड़ तक का जुर्माना शामिल है।
नीट परीक्षाओं के आयोजन में कथित कदाचार और यूजीसी नेट पेपर लीक को लेकर देश में बड़े पैमाने पर विवाद छिड़ा हुआ है। दरअसल, नीट परीक्षा में तकरीबन 1563 बच्चों को ग्रेस माक्र्स दिए गए थे, जिसका पता चलने के बाद इसमें धांधली तक के आरोप लगे और परीक्षा रद करने की मांग हुई। शिक्षा मंत्रालय ने इन छात्रों के दोबारा परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं, जो 23 जून को होंगे। नीट मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, जिसपर 8 जुलाई को सुनवाई होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अधिकारियों ने डार्कनेट पर प्रश्नपत्र पाए थे, जिसके बाद ये कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि मामले में विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है, जो एनटीए में सुधार की सिफारिश करेगी।