युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद का जिला मलेरिया विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, इस विभाग का विवादों से हमेशा नाता रहा है। लेकिन ताजा विवाद एक अधिकारी के चार साल से नौकरी से गायब रहने के बाद विभाग द्वारा जारी वेतन को लेकर है। इसका खुलासा कोविड के नामित नोडल अधिकारी सेंथिल सी पांडियान की छापेमारी में हुआ।
मलेरिया विभाग में तैनात इंस्पेक्टर अविनाश सिंह लखनऊ में रहकर गाजियाबाद से ड्यूटी कर रहा है जिसका उसे वेतन भी हर माह मिल रहा है। यह बात अलग है कि चार साल से मलेरिया विभाग के कर्मचारियों ने इंस्पेक्टर को देखा तक नहीं है। इतना ही नहीं २० से अधिक मलेरिया कर्मी हाजिरी लगाकर काम नहीं करते, इसका भी खुलासा हुआ है। इस पूरे प्रकरण में जिला मलेरिया अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आखिर कैसे बिना काम करें एक अधिकारी पिछले चार साल से वेतन ले रहा है। हालांकि, इस मामले में अधिकारी का कहना है कि अधिकारी का परिवार कोरोना संक्रमित है और इसी वजह से वह लखनऊ में है। हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब मलेरिया विभाग में बिना काम करे वेतन लेने का मामला सामने आया हो। विभाग में करीब सात साल पूर्व एक कर्मचारी जो पूर्व सीएमएस के बेटा है, उसने विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। जब यह लोग नौकरी का ज्वॉइंनिंग लेटर लेकर विभाग में पहुंचे तो उन्हें अपने साथ हुई ठगी का पता चला। इस मामले में उस दौरान आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। विभागीय जांच भी शुरू हुई लेकिन आज तक ना तो मामले का खुलासा हुआ और नाहीं स्वास्थ्य विभाग को आरोपी कर्मचारी का पता मिल सका। इसकी वजह से लाखों रुपये की ठगी का मामला फाइलों में दबकर रह गया। इसके अलावा विभाग में टेंडर के नाम पर भी बड़ा घोटाला सामने आया था जिसमें फर्म संचालक ने कई अधिकारियों की बातचीत के ऑडियो वायरल किए थे। लेकिन यह मामला भी खुलकर सामने नहीं आया और विभागीय अधिकारियों ने अपनी जान बचाने के लिए मामले को दबा दिया। मलेरिया विभाग में सालों से यह सिस्टम चल रहा है कि कर्मचारी हाजिरी लगाते हैं लेकिन काम नहीं करते तो वहीं वह बिना हाजिरी लगाए ही वेतन पाते हैं। जब भी फॉगिंग की बात आती है तो कर्मचारियों की कमी का रोना रोया जाता है। लेकिन उन कर्मचारियों को नहीं बुलाया जाता जो वेतन मिलने के बाद भी काम पर नहीं आते। अकेले मलेरिया विभाग ही नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य विभाग में भी ऐसे डॉक्टर और कर्मचारियों की लंबी फेहरिस्त है जहां बिना ड्यूटी पर आए कर्मचारी हर माह वेतन उठा रहे हैं। लेकिन इस मामले में आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नोडल अधिकारी ने इस मामले को पकड़ा तो खुद विभाग के आला अधिकारी ही उसके बचाव में उतर आए।