युग करवट ब्यूरो
नई दिल्ली। गैंगस्टर सतिंद्रजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ की अमेरिका के कैलिफोर्निया में गिरफ्तारी के बाद अब तक आतंकी संपर्क में आ चुके गैंगस्टर की जेल बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। गैंगस्टर एक ही जेल की बजाय अलग जेलों में रखे जाने का सुझाव फरीदाबाद में गृह मंत्रालय के चिंतन शिविर में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिया था। इस सुझाव पर गृहमंत्री अमित शाह के समक्ष दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड ने भी सहमति दी थी।
उत्तर भारत में आतंक के पर्याय बन चुके इन गैंगस्टर को उत्तर पूर्व के प्रदेशों और दक्षिण भारत की जेलों में रखने के सुझाव पर गृह मंत्रालय सैद्धांतिक सहमति दे चुका है। क्योंकि इसमें कोई कानूनी बाधा नहीं है। उत्तर प्रदेश का माफिया अतीक अहमद भी गुजरात के अहमदाबाद की जेल में बंद है। असल में अपने प्रभाव क्षेत्र की जेलों में गैंगस्टर जेल से बाहर अपने गिरोह गुर्गों से संपर्क कर ही लेते हैं।
गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई, काला जठेड़ी, नीरज बवाना, कुलविंद्रजीत सिंह खानपुरिया, सुनील बालयान उर्फ टिल्लू, कौशल, नीरज डबास उर्फ बाली में से कौशल को छोडक़र बाकी सब एनआइए के रडार पर हैं। एनआइए इन सभी गैंगस्टर के मास्टर माइंड लारेंस बिश्नोई को 10 दिसंबर तक पूछताछ के लिए अपनी गिरफ्त में रखेगी। गोल्डी बराड़ के भारत प्रत्यारोपण में कोई बाधा नहीं आए, इसके लिए भी लारेंस से पूछताछ काफी अहम है। क्योंकि लारेंस ही बताएगा कि गोल्डी और वह किन आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।