विशेष संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। अब तक सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी जातिगत आधार पर नहीं लगती थी। हालांकि पुलिस एवं प्रशासन के बड़े अधिकारियों की पोस्टिंग जरूर उनकी जाति के अनुसार की जाती रही है, जिसकी सरकार होती है उसकी सरकार में जाति विशेष के अफसरों की तैनाती का चलन बसपा सरकार के जमाने से चल पड़ा है। दो दशक से पहले किसी भी अधिकारी की तैनाती जाति के आधार पर नहीं होती थी, बल्कि उसकी काबलियत के आधार पर होती थी। लेकिन बसपा की सरकार आने के बाद जाति के आधार पर तैनाती मिलने लगी और फिर सपा की सरकार आई तो उसमें भी यही ढर्रा चला और फिर अफसरों का भी राजनीतिकरण हो गया। हालांकि भाजपा की सरकार में जाति विशेष के आधार पर पोस्टिंग नहीं होती थी, लेकिन अब भाजपा की सरकार में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखाई दे रही है।
हालांकि यह सबकुछ बड़े अफसरों की तैनाती में देखा जाता था, लेकिन अब एक ऐसा आदेश सामने आया जो बहुत चौंकाने वाला था। मैनपुरी लोकसभा के उप चुनाव में जो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है उस आदेश में पुलिसकर्मियों की जाति भी लिखी गई है। ऐसा पहली बार हुआ है। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी का कहना है कि ऐसा कभी नहीं होता था। आदेश में साफतौर पर जाति का जिक्र किय गया है। इतना ही नहीं तैनाती में इस बात का भी ख्याल रखा गया है कि मैनपुरी में जाति विशेष के उम्मीदवार की जाति के एक भी पुलिसकर्मी की ड्यूटी नहीं लगाई गई है। यदि ऐसा होने लगेगा तो फिर व्यवस्थाएं कैसे चलेंगी। कैसे भरोसा पैदा होगा। जरूरत इस बात की है कि कम से कम सरकारी कर्मचारियों को जाति विशेष के चश्मे से ना देखा जाये। अब तक वोटरों को लेकर जाति विशेष की बातें होती थीं, अगर सरकारी कर्मचारियों को भी जाति विशेष में बांट दिया जायेगा तो कैसे लोकतंत्र मजबूत होगा।