युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। पर्यावरणविद सुशील राघव ने केंद्र के पर्यावरण विभाग और यूपी सरकार के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा। जिसमें नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए गए है। आरोप है कि पर्यावरण सुधार के लिए जो पैसा 15 वित्त आयोग के माध्यम से निगम को दिया गया उसका ठीक से उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस मामले में राज्य सरकार ने निगम प्रशासन से जवाब मांगा है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने जवाब शासन को भेज दिया है।
विवाद की शुरुवात लोनी में पॉल्यूशन मापने के लिए लगे यंत्र को लेकर शुरू हुआ है। यह यंत्र लोनी में नगर पालिका परिषद के ऑफिस के ऊपर लगाया गया है। जो हर रोज पॉल्यूशन का इंडेक्स जारी करता है। अब निगम पर आरोप है कि उसकी सिफारिश से उसे वहां से हटाकर सिटी फोरेस्ट में हिंडन नदी कि किनारे लगाने की तैयारी है। इसी को लेकर अब विवाद तेज हो गया। उनका कहना है कि शहर में जो भी पलूशन मापक यंत्र लगाए गए है वह सभी यंत्र कम हाईट पर लगाए गए है। ताकि वह मानक के हिसाब से अधिक पलूशन के पार्टिकल नहीं पकड़ सके। बावजूद इसके कई अंतर्राष्टï्रीय कंपनियों द्वारा समय समय पर जो जांच की गई उसमें गाजियाबाद को दुनिया का कई बार तो दूसरा सबसे प्रदूषित शहर माना गया है। विवाद के चलते पर्यावरण विद सुशील राघव ने इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण विभाग, और यूपी सरकार के प्रमुख सचिव ने इस मामले में शिकायत की है। शिकायत में नगर निगम पर भी आरोप लगाया गया कि उन्हें पर्यावरण सुधार के लिए 15 वेें वित्त आयोग की ओर से कई करोड़ रुपये मिले है। मगर भ्रष्टïाचार के कारण पर्यावरण सुधार के लिए निगम ने कोई कार्य नहीं किया है।
न तो शहर को डस्ट फ्री बनाया गया और न ही शहर में पार्कों को विकसित करने में ही तेजी दिखाई गई है। इस मामले में शासन की ओर से निगम से जवाब मांगा गया है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस मामले में अपना पक्ष शासन को भेज दिया है। जिसमें बताया गया कि जो पैसा अवस्थाना निधि से मंजूर किया गया है उससे क्या क्या कार्य होने से ताकी शहर का पर्यावरण ठीक रहे।