– सुब्रत भट्टाचार्य –
गाजियाबाद। गाजियाबाद का राजनीतिक इतिहास को देखे तो आजादी के बाद से अब तक यहां सिर्फ तेजा सिंह ही तीन बार विधायक रहे। तेजा सिंह की सरलता की चर्चा आज भी की जाती है। वे विधायक थे लेकिन कहा जाता है कि वे साइकिल पर चला करते थे। सन 1952 से 1967 तक गाजियाबाद सदर से विधायक रहे तेजा सिंह के कार्यकाल के दौरान गाजियाबाद का तेजी से औद्योगिक विकास हुआ। तेजा सिंह के बाद से गाजियाबाद की राजनीति में यूं तो पंजाबी समाज सक्रिय रहा लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात की जाए तो इस समाज को पिछले 58 वर्षों से नजरअंदाज किया गया। चाहे संगठन में जगह देने की बात हो या चुनाव में टिकट देने की, सभी राजनीतिक दलों ने पंजाबी समाज की उपेक्षा की है। अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है यह मुद्दा फिर से गर्मा गया है। गुरुवार को पंजाबी महासभा ने प्रेस वार्ता कर आगामी विधानसभा चुनाव में पंजाबी समाज से किसी को टिकट देने की मांग की है। राष्ट्रीय लोक दल के नेता इंद्रजीत सिंह टीटू पिछले कई महीनों से इस मांग को उठा रहे हैं। युग करवट ने राजनीति में पंजाबी समाज की भूमिका, उनके प्रतिनिधित्व और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उनसे विस्तार से बातचीत की।
प्रश्न- राजनीतिक दलों के संगठन और चुनाव में पंजाबी समाज को प्रतिनिधित्व मिले, इसे लेकर आप पिछले काफी समय से मांग उठा रहे हैं। अब तो पंजाबी महासभा ने भी आपकी इस मांग का समर्थन करते हुए प्रेसवार्ता की है। महासभा का कहना है कि विधानसभा चुनाव में जो भी दल पंजाबी समाज से किसी व्यक्ति को टिकट देगा, पंजाबी समाज हर तरीके से उस उस प्रत्याशी को अपना समर्थन देगा। क्या कहेंगे?
उत्तर- देखिये पहले तो पंजाबी महासभा ने यह मांग उठाई, इसके लिए इसके सदस्यों को अनेक धन्यवाद। दरअसल पंजाबी समाज के हर व्यक्ति की यह पीड़ा है। पंजाबी समाज काफी समय से राजनीतिक तौर पर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। गाजियाबाद का जो वर्तमान स्वरूप आप देख रहे हैं, उसका काफी बड़ा श्रेय सरदार तेजा सिंह को जाता है। सरदार तेजा सिंह गाजियाबाद सीट से तीन बार विधायक थे। उनके विधायक रहते ही गाजियाबाद का सही मायने मायनों में विकास हुआ। यहां कल कारखाने लगे। रोजगार बढ़ा। दूर-दूर से आकर लोग गाजियाबाद में बसे। सरदार तेजा सिंह 1952 से लेकर 67 तक विधायक रहे। उसके बाद से ही पंजाबी समाज की लगातार उपेक्षा होती रही।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक ही दल ने पंजाबी समाज की उपेक्षा की है। सभी दलों ने पंजाबी समाज को संगठन और चुनाव में टिकट देने में कंजूसी दिखाई है। अब नई पीढ़ी जब खुद को राजनीतिक तौर पर उपेक्षित देखती हैं तो उनके मन में जिज्ञासा होती है कि जब हर क्षेत्र में पंजाबी समाज बराबर की हिस्सेदारी करता है तो राजनीति में उसे उसका हक क्यों नहीं दिया जाता है। यही सवाल आज पंजाबी समाज में उठ रहा है। मेरा मानना है कि यह सवाल कहीं से भी गलत नहीं है। हर समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पिछले 60 वर्षों का इतिहास उठाकर देख लीजिए एकाध मौकों को छोडक़र पंजाबी समाज की हर मौके पर अनदेखी की गई चाहे संगठन हो या चुनाव में टिकट देने की बात हो।
प्रश्न- आप का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा रहा है। आप पहले यूथ कांग्रेस में महानगर अध्यक्ष थे, फिर सपा में और अब रालोद में। इस राजनीतिक सफर को किस रूप में देखते हैं ?
उत्तर- देखिए, मैंने अपनी राजनीति की शुरुआत सरदार तेजा सिंह को आदर्श मानकर की थी। तेजा सिंह की ईमानदारी और सरलता का आज भी उदाहरण दिया जाता है। मैंने यूथ कांग्रेस से अपनी राजनीति शुरू की है। 7 साल तक यूथ कांग्रेस का महानगर अध्यक्ष रहा। इस दौरान गुलाब सिंह और और सरदार अपार सिंह से जनसेवा की प्रेरणा मिली। यूथ कांग्रेस का महानगर अध्यक्ष रहते हुए युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ा। सुरेंद्र गोयल के सांसद बनने पर मेरा नाम भी टिकट पैनल के लिए भेजा गया था। लेकिन दुर्भाग्य से टिकट नहीं हुआ। सांसद रहे सुरेंद्र गोयल को ही विधायक का टिकट दे दिया गया। इससे मुझे पीड़ा पहुंची।
मैंने कांग्रेस छोडऩे का फैसला लिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ। वहां भी करीब 6 साल तक रहा। एक मुलाकात के दौरान मैंने अखिलेश यादव से कहा था कि भले ही 1 दिन के लिए हो पंजाबी समाज के किसी व्यक्ति को राजनीतिक प्रतिनिधित्व अवश्य दिया जाए। लेकिन कहा जाता है ना कि बड़े पेड़ के आगे छोटा पेड़ छिप जाता है ऐसे ही दूसरे समाजों के आगे पंजाबी समाज का प्रतिनिधित्व करने की मांग छिप सी गई थी। अब जब विधानसभा चुनाव होना है मैंने एक बार फिर अपने अध्यक्ष जयंत चौधरी से गाजियाबाद के किसी एक सीट से पंजाबी समाज के किसी एक व्यक्ति को टिकट देने की मांग उठाई है। यह मांग कहीं से भी नाजायज नहीं है क्योंकि आबादी या राजनीतिक तौर पर सक्रियता को देखा जाए तो पंजाबी समाज के लिए यह हक भी बनता है।
प्रश्न- अगर वोटर्स की बात की जाए तो गाजियाबाद जिले की 5 सीटों में पंजाबी समाज के कितने वोटर हैं, जिसके आधार पर आपका समाज दावा कर रहा है ?
उत्तर- देखिए, एक बात मैं पहले स्पष्ट कर दूं कि आबादी को देखकर पंजाबी समाज अपने लिए टिकट नहीं मांग रहा है बल्कि गाजियाबाद के विकास और हर क्षेत्र में भागीदारी को देखते हुए पंजाबी समाज इस बार विधानसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व का हक मांग रहा है। वैसे अगर वोटर्स की बात की जाए तो साहिबाबाद विधानसभा में करीब 60 हजार पंजाबी समाज के वोटर्स है। गाजियाबाद में 50000 और मुरादनगर में भी करीब 50000 वोटर्स है। लोनी और मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र में भी 40 से 50000 वोटर्स है। पंजाबी समाज ने कभी भी किसी अन्य समाज या जाति से भेदभाव नहीं किया है। ऐसे में कह सकते हैं कि पंजाबी समाज से प्रत्याशी होने पर उसे सभी समाज और सभी जाति का वोट मिलेगा। पंजाबी समाज राजनीति में भागीदारी मांग रहा है, सभी दूसरे समाज भी ऐसा कर रहे हैं। ऐसे में अगर पंजाबी समाज की ओर से यह मांग उठी है तो इसमें गलत क्या है। दूसरी बात अगर 5 में से किसी एक सीट पर पंजाबी समाज से प्रत्याशी उतारा जाता है तो अन्य 4 सीटों पर भी इसका फायदा होगा। पंजाबी समाज एकजुट होकर समाज के प्रत्याशी के पक्ष में मत मतदान करेगा।
प्रश्न- अगर पिछले 58 वर्षों से पंजाबी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ समाज भी जिम्मेदार है, क्योंकि समाज ने कभी ऐसी मांग भी नहीं रखी क्या कहेंगे
उत्तर-जी, आपने सही कहा। हमारे समाज के अंदर ही शायद यह कमी रही होगी कि हमने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरत को नहीं समझा। पंजाबी समाज दूसरों के नेतृत्व को स्वीकार करता रहा लेकिन कभी भी आगे बढक़र नेतृत्व करने के बारे में नहीं सोचा। नई पीढ़ी अब यह सोचने लगी है कौन सा समाज ऐसा होगा जो यह नहीं चाहेगा कि सत्ता और संगठन में उसका भी प्रतिनिधित्व हो।
प्रश्न- पंजाबी समाज सामाजिक और धार्मिक कार्यों में बढ़ चढक़र हिस्सा लेता है समाज को हमेशा परोपकार के लिए जाना जाता है ?
उत्तर- देखिए, जब देश और समाज के सामने कोई समस्या खड़ा होती है तो पंजाबी समाज मदद के लिए सबसे आगे रहता है। कोरोना काल के दौरान पंजाबी समाज के लोगों ने बढ़-चढक़र पीडि़त लोगों की सेवा की। मुझे यह बताना अच्छा नहीं लग रहा है फिर भी पंजाबी समाज ने हमेशा लोगों की मदद करने को अपना धर्म माना है। समाज ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है। गाजियाबाद का पंजाबी समाज को तो दोहरी मार झेली है विभाजन की त्रासदी और नए सिरे से कारोबार शुरू करना, फिर भी अपनी मेहनत और लगन से पंजाबी समाज ने गाजियाबाद में अपनी एक पहचान कायम की है।
प्रश्न- आप राष्ट्रीय लोक दल से गाजियाबाद सदर सीट के लिए प्रबल दावेदार है ऐसे में गाजियाबाद सीट के लिए आपका क्या विजन रहेगा?
उत्तर-सरदार तेजा सिंह ने उन्नत और औद्योगिक गाजियाबाद का सपना देखा था, उनके समय में यहां कई उद्योग लगे लेकिन बाद में धीरे-धीरे गाजियाबाद की औद्योगिक छवि धूमिल होती गई। मेरी पहली कोशिश होगी कि गाजियाबाद को फिर से औद्योगिक नगरी के रूप में इसकी पहचान कायम की जाए। इसके लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा। गाजियाबाद विधानसभा का एक बड़ा क्षेत्र लाइनपार में है। जहां करीब ढाई लाख की आबादी रहती है यह क्षेत्र विकास से कोसों दूर है। आजादी के 70 साल बाद भी लाइनपार क्षेत्र के कई इलाकों में जलभराव हो जाता है वहां शुद्ध पानी नहीं मिलता है ना सरकारी अस्पताल है और ना ही ना ही कोई विश्वविद्यालय यहां तक कि लड़कियों के लिए भी कोई स्कूल नहीं है। लाइनपार क्षेत्र से गाजियाबाद की कनेक्टिविटी भी नहीं है। मेरी कोशिश होगी कि लाइनपार क्षेत्र को वह सारी सुविधाएं दी जाए जो गाजियाबाद की पॉश कॉलोनियों के लोगों को मिल रही है। क्षेत्र के गरीब शोषित और वंचित लोगों को अधिकार दिलाने उनके दरवाजे जाऊंगा।
प्रश्न- अगर आपको सपा रालोद गठबंधन से टिकट नहीं मिलता है तो क्या आप निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं
उत्तर- मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं आगामी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के तौर पर चुनाव नहीं लडऩे वाला हूं। अगर चुनाव लड़ूंगा तो गठबंधन से ही। आप के माध्यम से मैं पार्टी नेतृत्व से गुजारिश करना चाहूंगा कि टिकट फाइनल करने से पहले अपने स्तर पर एक सर्वे करा ले। इस सर्वे में अगर मेरे बारे में पॉजिटिव रिस्पांस मिलता है तो अवश्य ही मुझे टिकट देने में विचार करें। उम्मीद ही नहीं पूरा भरोसा है कि हमारे नेता जयंत चौधरी और अखिलेश यादव पंजाबी समाज के इस दर्द को समझेंगे और आगामी विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद की 5 में से एक सीट पर पंजाबी समाज से किसी एक प्रत्याशी को खड़ा करेंगे।