नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। जिले में बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए पिछले नौ महीने में १७ रोजगार मेले लगाए गए, इसमें छह हजार 65 युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन इसके बाद भी महज तीन हजार ३२६ युवाओं को ही नौकरी मिल सकी बाकी के दो हजार ७३९ युवा रजिस्टे्रशन कराने के बाद भी बेरोजगार रह गए।
आंकडों नजर डालें तो शुरुआत के चार महीने, एक अपै्रल से ३१ अगस्त २०२३ तक नौ रोजगार मेलों का आयोजन हुआ था जिसमें २४३७ युवाओं ने रजिस्टे्रशन कराया लेकिन महज ९७१ आवेदकों को ही नौकरी मिल सकी। इन मेलों को बडे जोरशोर से प्रचार प्रसार भी किया गया और दावा किया गया कि पंजीकृत युवाओं को रोजगार दिलाया जाएगा। लेकिन समय-समय पर लगने वाले इन रोजगार मेलों की हकीकत कुछ ओर ही निकली। एक संस्थान में बडे स्तर पर रोजगार मेला लगाया गया ओर एक हजार से अधिक युवाओं को नौकरी देने का दावा किया गया। विभागीय जानकारी के अनुसार पिछले नौ महीने में जिले में १७ रोजगार मेलों का आयोजन किया गया जिसमें नौकरी पाने के लिए ६०६५ युवाओं ने अपना पंजीकरण कराया। विभिन्न कपंनियों ने आवेदकों के साक्षात्कार किए। विभिन्न पदों के लिए कई चरणों में इन्टरव्यू लिए गए। लेकिन फाइनल होते-होते महज ३३२६ युवाओं को ही रोजगार मिल सका, इनमें भी किसी भी युवा को बडे पैकेज की नौकरी नहीं मिल सकी। तो वहीं बाकी के २,७३९ आवेदक ऐसे रहे कि जिन्हें इन १७ रोजगार मेलों में नौकरी तक भी नसीब नहीं हो सकी। सूत्र बताते हैं कि जिन युवाओं को इन मेलों में नौकरी दी गई है उनमें से भी अधिकतर युवाओं को कंपनियों ने दो से तीन महीने में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसको लेकर अधिकारी यह कहकर अपना बचाव करते हैं कि कम्पनी के मानकों पर खरे न उतरने के चलते उन्हें नौकरी से हटाया गया होगा। उनका काम नौकरी दिलवाना है लेकिन भविष्य में कंपनी और आवेदक के बीच काम को लेकर होने वाली प्रक्रिया से उन्हें कोइ मतलब नहीं है।