युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर देश भर में आज से बैंककर्मी दो दिन की हड़ताल पर चले गए हैं। इस दो दिवसीय हड़ताल से अकेले जिले में कई सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ तो वहीं बैंक में काम कराने आए उपभोक्ताओं को भी बैरंग लौटना पड़ा। यूनियन के आह्वान पर जिला यूनियन ने नवयुग मार्किट स्थित केनरा बैंक के सामने बैंककर्मियों ने प्रदर्शन करते हुए निजीकरण का विरोध किया। यूएफबीयू के जिला संयोजक सुनील गोयल ने बताया कि यूनियंस की सरकार के साथ बातचीत विफल हो गई इसके बाद यूनियन के आह्वान पर दो दिन की हड़ताल की गई है। निजीकरण के साथ प्रतिगामी बैंकिंग सुधारों के साथ-साथ बैंकिंग कानूनों २०२१ को वापस लेने की मांग प्रमुख है। सरकार धीरे-धीरे सरकारी बैंकों का निजीकरण कर रही है जिससे आम जनता के साथ ही बैंक कर्मियों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। सरकार अब अन्य कई बैंकों का निजीकरण करने की तैयारी में हैं जिसका विरोध हड़ताल के जरिए किए जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मियों ने केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दो दिन तक चलने वाली इस हड़ताल से बैंकों में कई सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित होगा। १९ दिसंबर शनिवार को बैंकों में किसी अन्य कारण से अवकाश रहेगा और उसके बाद रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के चलते अब सोमवार को ही बैंक खुलने की संभावना है। यूनियन ने अभी दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। लेकिन अगर निजीकरण वापस नहीं लिया तो आगे की रणनीति भी यूनियन पदाधिकारियों द्वारा बनाई जा रही है। हालांकि हड़ताल की पूर्व घोषणा यूनियन पूर्व में ही कर चुकी थी लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में लोग बैंकों में अपना कामकाज कराने पहुंचे लेकिन बैंक बंद होने व कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने से उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा। हालांकि इस दौरान बैंक प्रबंधन ने ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर एटीएम में कैश को लेकर कोई समस्या न होने का दावा किया है। बैंकों की पहले दिन हड़ताल से ही कारोबारियों को चेक लेनदेन को लेकर समस्या शुरू हो गई। चेक क्लियरेंस न होने से कारोबार पर भी असर पड़ा।