युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। जिस खेल की कई महीने पहले निगम में स्क्रीप्ट लिखी गई थी। उस खेल को जलकल विभाग ने अब खेलना शुरू कर दिया है। जलकल विभाग ने अब मार्केट रेट से कई लाख रुपये अधिक में नई ट्यूबवेल लगाने और पुरानी ट्यूबवेल को रिबोर करने का वर्क ऑर्डर जल निगम को अचानक जारी कर दिया। नगर निगम जल निगम के जरिए एक नई ट्यूबवेल लगवाएगा और सात पुरानी ट्यूबवेल के रिबोर कराएगा।
इस कथित घोटाले को सबसे पहले बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने उठाया था। उनका कहना था कि जल निगम से नगर निगम मार्केट से अधिक पैसा देकर ट्यूबवेल को रिबोर और नई ट्यूबवेल लगवाना चाहता है। निगम पर इसके लिए कितना दबाव है कि नगर निगम ने सात दिसंबर को पिछले वर्ष जल निगम के एकाउंट में दो करोड़ 54 लाख रुपये ट्रासफर कर दिए थे। जबकि वर्क ऑर्डर जारी किया गया इसके तीन दिन बाद यानि 10 दिसंबर को। बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी का यह भी आरोप था कि जल निगम से नगर निगम नई ट्यूबवेल 49 लाख रुपये में लगवाने जा रहा है उसे निगम के प्राइवेट ठेकेदार केवल 31 लाख रुपये में लगाने को तैयार है। जिस ट्यूबेवल के रिबोर करने का कार्य नगर निगम के ठेकदार केवल 18 लाख रुपये लेता है वहीं कार्य जल निगम करीब 28 लाख रुपये नगर निगम से लेता है।
विवाद के बाद नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी। इस संबंध में नगर आयुक्त ने जल निगम की टीम को तलब भी किया था। उनसे यह जस्टीफाई करने के लिए कहा था कि उनका रेट मार्केट से इतना ज्यादा क्यों है। जबकि वह भी कार्य प्राइवेट कंपनी से कराता है। यह कार्य नगर निगम ने जल निगम की मेरठ युनिट को दिया था। जल निगम की यह युनिट आज तक भी रेट को जस्टीफाई नहीं कर पाई।
उस समय जब विवाद ने तूल पकड़ा तो नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने जल निगम को दिए गए नौ ट्यूबवेल रिबोर और एक नई ट्यूूबवेल लगाने के कार्य को रोक दिया था। इसी बीच जलकल विभाग के अधिशासी अभियंता योगिंद्र यादव का कहना था कि जल निगम को इस लिए कार्य दिया गया कि इस मामले में शासनादेश है। शासनादेश में कहा गया कि नई ट्यूबवेल लगवाने और पुरानी ट्यूबवेल रिबोर करने के सभी कार्य जल निगम से ही कराए जाएंगे। तब पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने इसका खुलासा किया। जिस आदेश की बात कहकर जलकल विभाग भ्रमित करने की कोशिश कर रहा था शासन ने ही उस आदेश को रद्द कर दिया था। यानि जल निगम से कार्य कराने की कोई बाध्यता नहीं है।
अब पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने इस पूरे घोटाले पर ही चुप्पी साध ली है। हो सकता है कि यह परिस्थितिवश हो। इसी के चलते अब अचानक जलकल विभाग ने अब नया खेल खेलना शुरू कर दिया। जलकल विभाग ने अब दो करोडत्र 54 लाख रुपये से दस ट्यूबवेल रिबोर और नई लगाने का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। अब जलकल विभाग का कहना है कि मेयर की अध्यक्षता वाली अवस्थाना निधि की कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ है। जलकल विभाग के जीएम योगेश कुमार श्रीवास्तव ने इस प्रकरण में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।