युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। निगम का एक नया खेल सामने आया है। पन्द्रह वर्ष के लिए जो विज्ञापन का ठेका दिया गया है वह करीब 250 करोड़ रुपये के रेवैन्यू का ठेका है। निगम ने इसका रेंट एग्रीमेंट मात्र 100 रुपये के स्टांप पेपर पर निष्पादित कर नया विवाद पैदा कर दिया। इससे सरकार को करीब दस करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
नगर निगम द्वारा 15 वर्ष के लिए हाल ही में शहर में विज्ञापन करने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया है। कंपनी को अधिकार दिया गया कि वह नगर निगम क्षेत्र में करीब 15 हजार वर्ग मीटर एरिया में अपना विज्ञापन कर सकेगी। इससे निगम को अगले पन्द्रह वर्षों के अंदर अनुमान है कि 250 करोड़ रुपये का कारोबार करने का मौका मिलेगा।
विज्ञापन के इस ठेके को लेकर विवाद चल रहा है। इसको लेकर एक और विवाद खड़ा हो गया है। इस बार निगम की ओर से नई चूक सामने आई। निगम ने अगले पन्द्रह वर्षों के लिए हुए इस करीब 250 करोड़ रुपये के रेंट एग्रीमेंट का अनुबंध नगर निगम ने मात्र 100 रुपये के स्टांप पेपर पर कर दिया। इसको लेकर अब निगम पर ही सवाल खड़े हो रहे है। रेंट एग्रीमेंट स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के नियम के मुताबिक करीब चार प्रतिशत स्टांप शुल्क देना होता है। इस हिसाब से सरकार को ही स्टांप शुल्क के तौर पर नगर निगम को करीब दस करोड़ रुपये की चपत लगी है।
बीजेपी पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि इस प्रकरण को भी हाईकोर्ट में दयर रिट का हिस्सा बनाया गया है। निगम ने सरकार को ही आर्थिक चपत लगाई है। इस मामले में हम चुप नहीं बैठेंगे।
बीजेपी पार्षद राजीव शर्मा का कहना है कि यह एक बेहद गंभीर मामला है और वह इस मामले में प्रशासन से नगर निगम की शिकायत करेंगे। इससे सरकार को दस करोड़ रुपये के रेवैन्यू का नुकसान हुआ है।