गाजियाबाद। तुलसी निकेतन के जर्जर फ्लैट को लेकर अब नगर निगम ने चुप्पी तोड़ी। निगम का कहना है कि तुलसी निकेतन कॉलोनी जीडीए की है। अभी निगम को हैंडओवर नहीं हुई है। ऐसे में वहां जो भी फ्लैट जर्जर घोषित है उन्हें खाली कराने या नहीं कराने का दायित्व जीडीए का ही है। तुलसी निकेतन के ढ़ाई हजार फ्लैट ऐसे है जिनको जीडीए की जर्जर घोषित कर चुका है। इसके लिए जीडीए ने जामियामिलिया यूनिवर्सिटी से सर्वे कराने के बाद यह कार्रवाई की थी। जीडीए ने इन सभी फ्लैट को खाली करने के लिए नोटिस भी चस्पा किए थे। बाद में इन सभी नोटिसो को लोगों ने उतार फैंक दिया। ऐसे में जब भी बरसात होती है तब ही जीडीए के अधिकारियों की टेंशन बढ़ जाती है। वह इसके साथ ही एक पत्र नगर निगम को लिखते है। जिसमें दावा करते है कि नगर निगम एक्ट की पावर का इस्तेमाल कर जर्जर घोषित फ्लैट खाली कराने का कार्य करे। निगम के चीफ इंजीनियर एनके चौधरी का दावा है कि जब से बरसात का सीजन शुरू हुआ है तब से जीडीए इस मामले में निगम को तीन बार पत्र लिख चुका है।