गाजियाबाद। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए तैयार आईटीएमएस यानि इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट की डीपीआर फंस गई है। आईटीएमएस प्रोजेक्ट करीब 72 करोड़ रुपये का है। इसके तहत शहर के 113 चौराहों और तिराहों पर स्मार्ट कैमरे लगाने की योजना थी। निगम ने आईटीएमएस योजना के लिए पांच महीने पहले डीपीआर तैयार कर भेजा था। प्रदेश सरकार ने डीपीआर की जांच के लिए कंसलटेंट कंपनी केपीएमजी के पास भेज दिया। कंपनी ने इस दौरान एक खामी पकड़ी। कंपनी ने सरकार से कहा कि आईटीएमएस का डीपीआर तैयार करते वक्त ट्रैफिक पुलिस की सहमति नहीं ली गई। करीब तीन महीने पहले आईटीएमएस का संशोधित डीपीआर तैयार किया गया। डीपीआर की जांच का कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद भी अब शासन का इस प्रोजैक्ट के लिए ग्रीन सिग्नल नहीं मिल रहा है। अब बताया जाता है कि इस प्रोजैक्ट को लेकर अब नई समस्या पैदा हो गई है। दरअसल निगम ने बीजेपी के एक नेता की कंपनी को कई चौराहों के रखरखाव और ट्रैफिक लाइट लगाने का ठेका दिया है। बीजेपी के इस नेता की शासन में पकड़ के कारण अब आईटीएमएस अटक गया है। इसी के चलते अब जीडीए और निगम के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को लेकर बोलने को तैयार नहीं है।