प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। बीजेपी पार्षद राजेन्द्र त्यागी ने अव्यवस्थाओं को लेकर नगर निगम को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम भ्रष्टïाचार का अड्डा बना है। 30 प्रतिशत तक कमीशन चल रहा है। इसे कौन रोकेगा। क्या नगर आयुक्त और मेयर को यह रोकना नहीं चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि नगर निगम विकास कार्य को लेकर दबाव बनाने की जो रणनीति बना रहे है वह गलत है। उनका कहना है कि अधिकारियों की कोशिश जनता पर बोझ डालने की रहती है। मगर नियमों को ताक पर नहीं रखा जा सकता है। जब पिछले वर्ष नगर निगम हाउस टैक्स में 15 प्रतिशत का ईजाफा कर चुका है तो इस बार निगम किस नियम के तहत हाउस टैक्स बढ़ाने का दबाव बना रहा है। नियम के खिलाफ बोर्ड निगम को नहीं जाने देगा। पार्षद त्यागी ने कहा कि क्या नगर आयुक्त और मेयर आशा शर्मा का यह दायित्व नहीं है कि वह समन्वय बनाकर शासन से निगम का 500 करोड़ रुपये लेकर आए। ताकी शहर में विकास कार्य हो। जो पैसा शासन में अवस्थापना निधि का 500 करोड़ रूपये बकाया है वह शहर की जनता का पैसा है। यह वह पैसा है रजिस्ट्री के दौरान कुल स्टांप शुल्क का दो प्रतिशत शहर के विकास के लिए लिया जाता है। अगर यह पैसा शासन नहीं दे रहा है तो यह भी बताना चाहिए कि इसके लिए निगम ने क्या प्रयास किए है। इसके लिए मेयर नगर आयुक्त पार्षदों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नगर निगम आज अव्यवस्थाओं का अड्डा बना हुआ है। निगम में कमीशन 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे रोकने की किसकी जिम्मेदारी है! एक सवाल के जवाब में पार्षद त्यागी ने कहा जब तक नगर निगम लीकेज नहीं रोकेगा उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होगी। उनका कहना है कि निगम ने कई ऐसे फैसले लिए जिससे पैसा बरबाद हुआ। शहर में कई करोड़ रुपये की गारबेज फैक्ट्री तैयार कर दी गई। इनका क्या यूज है, नगर आयुक्त सदन को बताएं।
अगर इनका इतना ही यूज है तो गोविंदपुरम में प्रस्तावित गारबेज फैक्ट्री को निरस्त क्यों कर दिया गया। नगर निगम पर सरकारी पैसे का दुर्पयोग करने का भी आरोप पार्षद त्यागी ने लगाया। उन्होंने कहा कि ईको पार्क में साढे चार करोड़, प्रताप विहार गारबेज प्लांट में पांच करोड़ निगम ने बरबाद किए।