युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। आज से एक माह पूर्व महानगर कांग्रेस कमेटी में पार्षद टिकट के लिए आवेदन करने वालों की बाढ़ सी आ गई थी। पार्टी के नेता एवं कार्यकर्ता लगातार पार्षद पद के टिकट की मांग करते हुए बायोडाटा दे रहे थे, लेकिन वर्तमान में यह सिलसिला थम सा गया है। बड़ा सवाल है कि क्या कांग्रेस का संगठन जितेन्द्र पाल प्रकरण के बाद हुई फजीहत से सबक लेकर एक-एक कदम फूंक-फूंककर रख रहा है? दरअसल, इसी साल नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी टिकट की दावेदारी ठोकनी शुरू कर दी है। महानगर कांग्रेस कार्यालय पर पार्षद के लिए टिकट की दावेदारी करने वालों की कतार भी लगनी शुरू हो गई थी, लेकिन पिछले लगभग पंद्रह दिनों से यह सिलसिला थम सा गया है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार पार्षद जितेन्द्र पाल प्रकरण के बाद से महानगर कांग्रेस कमेटी फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
दरअसल, पार्षद जितेन्द्र पाल की ज्वॉइनिंग के बाद कांग्रेस में भूचाल आ गया था। जितेन्द्र पाल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोडक़र समाजवादी पार्टी में जा चुके थे। उनका फिर से कांगे्रस में आना पार्टी के कुछ नेताओं के गले नहीं उतरा, उन्होंने इसका खुलकर विरोध किया था। नतीजन, पार्टी हाईकमान को इस प्रकरण में गाइडलाइन जारी करनी पड़ी थी और साफ किया कि बिना अनुमति के कांग्रेस में कोई एंट्री नहीं होगी। पार्षद जितेन्द्र पाल की ज्वॉइनिंग को भी पार्टी हाईकमान ने गलत मानते हुए, इसे अनुशासनहीनता माना था और पार्टी महानगर अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इस प्रकरण के बाद से महानगर कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर कांग्रेसियों द्वारा की जा रही आवेदन प्रक्रिया पर वीराम लग गया है। नगर निगम चुनाव के लिए दावेदारी का सिलसिला कब शुरू होगा, इस बात पर सभी की निगाहें लगी रहेंगी।