युग करवट ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश सरकार को नगरीय निकायों से मिले वार्ड आरक्षण के प्रस्तावों में कई तरह की त्रुटियां मिली हैं। कई निकायों ने मानकों का पालन किए बगैर ही प्रस्ताव भेज दिया है। कुछ निकायों ने जनसंख्या के आंकड़ों में ही खेल कर दिया है। इसके चलते आरक्षित सीटों में अंतर आ रहा है। शासन अब ऐसे नगरीय निकायों के अधिकारियों को बुलाकर उनके प्रस्तावों को ठीक करा रहा है। ऐसे में कुछ नगरीय निकायों के वार्ड आरक्षण की अनंतिम अधिसूचना एक-दो दिन में जारी होने की उम्मीद है। महिला आरक्षण को लेकर शासन ने एक स्पष्टीकरण उसी दिन जारी कर दिया था। इस कारण निकायों से वार्ड आरक्षण के प्रस्ताव भी विलंब से मिले। जो प्रस्ताव मिले उनमें भी खामियां सामने आई हैं।
कई नगरीय निकायों ने रैपिड सर्वे में मिले आंकड़ों का ठीक से मिलान ही नहीं किया है या फिर चक्रानुक्रम नियमों का पालन पूरी तरह से नहीं किया है। शासन स्तर पर प्रस्तावों की जांच में कई खामियां मिल रही हैं। यदि सरकार ने वार्ड आरक्षण के प्रस्तावों में त्रुटियां न सुधारीं तो आगे चलकर न्यायालय में मामला फंस सकता है। यह देखा जा रहा है कि वर्ष 2017 के चुनाव में इनका क्या आरक्षण था और क्या भेजा गया है। कहीं किसी के दबाव में मनमाने तरीके से तो आरक्षित नहीं कर दिया गया है। वहीं, नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात से आरक्षण की शिकायतों को लेकर रोज विधायक व चेयरमैन मिल रहे हैं। ज्यादातर शिकायतें वार्डों के आरक्षण के प्रस्ताव में नियमों का पालन न करने की हैं।