कहा जाता है कि कई बार आपका काम ही आपकी पहचान बन जाता है। प्रशासन में तो काम बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। बात पुलिस विभाग की हो तो यहां ऐसे लोग बिरले ही मिलते हैं जिनका काम लोगों को प्रभावित करता है। उस पर पुलिसकर्मी महिला हो तो मुंह से वाह निकलना वाजिब ही है। वाकया 19 जनवरी की शाम तकरीबन सात बजे हापुड़ में तहसील चौपले का है। सर्दी का आलम था, अंधेरा घिर चुका था, चौराहे पर ट्रेफिक का दबाव बहुत अधिक था। वाहन चालक जल्द से जल्द चौराहा पार कर निकल जाने को आतुर थे। इससे यातायात बाधित होने लगता था। वहां कुछ पुरुष सिपाहियों के साथ एक महिला पुलिस कर्मी भी थी। वह इंस्पेक्टर थी या सब इंस्पेक्टर यह तो नहीं पता क्योंकि सर्दी के कारण उन्होनें जैकेट पहनी हुई थी इसलिए कंधे के सितारे नजर नहीं आए। नाम का तो पता चलना संभव ही नहीं था। मगर जिस तरह से वह ट्रेफिक को संभाल रही थी उसकी तारीफ किए बिना रह ही नहीं सकते। बड़े अदब और संयम से वह लोगों को ट्रेफिक के नियम का पालन करने के लिए समझा रही थी। न कोई झल्लाहट, न चेहरे पर शिकन, थकान के भाव तो दूर दूर तक चेहरे पर नहीं थे। एक तो महिला, ऊपर से सर्द शाम, उस पर चौराहे के ट्रफिक का दबाव, ऐसे हालात में शांति और संयम का ऐसा समागम कहां देखने को मिलता है। उस वक्त हापुड़ के तहसील चौराहे से गुजरने वाला हर संजीदा वाहन चालक इस महिला पुलिसकर्मी को सेल्यूट करके गुजर रहा था। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सेल्यूट में कोई मजबूरी नहीं थी बल्कि सम्मान की भावना थी। वो सम्मान, जिसे पाना हर सरकारी कर्मचारी की इच्छा हो सकती है। कितने ही पुलिसकर्मी ऐसे होते हैं जिनको देखते ही सामान्यजन अपनी भाषा की मर्यादा खो देता है। लेकिन इस महिला जैसे भी पुलिसकर्मी हैं जो बिना जान पहचान के भी सम्मान हासिल कर लेते हैं।