युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। दिव्यांगों को चलने-फिरने में बेहतर सुविधा देने के उद्ेश्य से उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल देने की योजना प्रशासन ने बनाई थी, लेकिन ऐसी ट्राईसाइकिल बनाने वाली एजेंसी नहीं मिलने पर दिव्यांग कल्याण विभाग को शासन को ३७ लाख रुपए की धनराशि सरेंडर करनी पड़ी। जबकि कई दिव्यांग, विभाग में मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल लेने के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। बता दें उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना पूरे प्रदेश के लिए थी, जिसमें दिव्यांगों को हाथ से चलाने वाली के बजाए मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी जाए, जिससे उनका आवागमन आसान और जल्दी हो सके। इसके लिए विभिन्न ट्राइसाइकिल बनाने वाली एजेंसियों से जिलेवार टेंडर मांगे गए थे, लेकिन एक दो जिलों को छोडक़र अन्य किसी जिले में भी एजेंसी आगे नहीं आई, इसमें गाजियाबाद जिला भी शामिल है। जिले में भी किसी एजेंसी ने इतने बड़े पैमाने पर ट्राईसाइकिल देने में असमर्थता जताई, जिसकी वजह से एक भी आवेदन नहीं आया और योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इतना ही नहीं विभाग को सारी धनराशि भी सरेंडर करनी पड़ी। जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार का कहना है कि ऐसा नहीं है योजना को बंद किया जाएगा। पिछले वित्तीय वर्ष पैसा गया है, लेकिन नए सत्र में फिर से एजेंसियों से सम्पर्क करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि योजना को अमली जामा पहनाया जा सके। विभाग अपने स्तर से प्रयास जारी रखेगा। जो भी लोग आ रहे हैं, उनका पूरा ब्यौरा रखा जा रहा है जिससे ट्राईसाइकिल मिलते ही उनका वितरण कराया जा सके।