युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। सूर्य की उपासना का सबसे बड़ा महापर्व आज से नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गया। चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व में सूर्य को पहला अघ्र्य दस नवंबर को दिया जाएगा तो वहीं ११ नवंबर को उदयगामी सूर्य को अघ्र्य देने के उपरांत व्रत संपन्न होगा। दीवाली के छह दिन उपरांत कार्तिकमास की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। सोमवार को नहाय-खाय के साथ व्रतियों ने सूर्य की उपासना के इस महापर्व का शुभारंभ किया। व्रती संतान की प्राप्ति, सुख-समृद्धि, संतान की दीघार्यु और आरोग्य की कामना के लिए साक्षात सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करती हैं। पहले दिन व्रतियों ने छठ व्रत का संकल्प लेकर सात्विक भोजन का भोग छठी मैया को अर्पण कर भोजन ग्रहण किया। छठ पूजा करने वाले व्रती लकड़ी के चूल्हे पर ही भोजन बनाते हैं उसमें भी आम की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसका भोजन बनाकर उसका भोग सूर्य देव को लगाया जाता है। व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद बाकी परिवार के सदस्य को इसे परोसा जाता है। हालांकि, यह महापर्व बिहार और झारखंड में पूरे उत्साह से मनाया जाता है लेकिन जहां-जहां पूर्वांचली लोग बसे हुए हैं, वहां भी छठपर्व की धूम अलग ही देखने को मिलती है। गाजियाबाद में हजारों की संख्या में पूर्वांचली लोग निवास करते हैं जो अपने पैतृक आवास ना जाने के कारण यहीं पर पूरी धूमधाम से पर्व को मनाते हैं। छठ पूजा को सूर्य की उपासना के साथ ही प्रकृति प्रेम और प्रकृति पूजा का बड़ा उदाहरण भी माना जाता है। सोमवार को छठ पूजा के पहले दिन नहाय खाय के साथ इसे शुरू किया गया। छठव्रतियों ने स्नान कर शुद्घ शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरूआत की। दिन भर उपवास के बाद व्रती शाम को चूल्हे पर गुड़ एवं चावल की खीर और रोटी का प्रसाद बनाते हैं। मंगलवार को खरना के साथ ही ३६ घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा।