विशेष संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम चुनाव को लेकर सभी दलों ने तैयारी शुरु कर दी है। हालांकि भाजपा तैयारी में सबसे तेज है। कांग्रेस, सपा, बसपा ने तो अभी तक एक बैठक भी नहीं की है। बसपा ने जरूर कल इस संबंध में पहली बैठक की थी। वहीं अगर गाजियाबाद की बात करें तो यहां पर तो एक माह पहले ही तैयारियां शुरु हो गई हैं और मेयर के दावेदारों की बात करें तो ४६ से अधिक लोगों ने अपनी दावेदारी की है। इसमें अगर बात करें तो १० से १२ लोग ऐसे हैं जो मेयर के टिकट के लिए गंभीर हैं, वरना कुछ तो ऐसे दावेदार हैं जो कहते हैं कि पार्षद का टिकट नहीं मिल रहा है तो मेयर की दावेदारी करके जरूर चर्चाओं में बना रहना है उनका उद्देश्य है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा हाईकमान ने भी स्थानीय संगठन से कहा है कि वो केवल पांच यो सात लोगों के ही नाम भेजें। हालांकि इस सात या पांच में से भी तीन नाम जो सबसे ऊपर होंगे। उस पर ही विचार संभव है।
सूत्र बताते हैं कि कभी-कभी पहले नंबर पर जिनका नाम होता है वह तीसरे नंबर पर चला जाता है और तीसरे नंबर वाला पहले नंबर पर आ जाता है। इसलिए दावेदार टॉप थ्री वाली सूची में नाम डलवाने के लिए भी पूरी कोशिश करते हैं। हालांकि टॉप थ्री और टॉप फाइव में भी अगर किसी दावेदार का नाम आता है तो वह भी अपने आप में कम बड़ी बात नहीं है। सूत्रों ने बताया कि गाजियाबाद सीट पर भले ही दावेदारों की लंबी सूची हो, लेकिन कुछ खास नामों पर ही मंथन होने की उम्मीद है। एक ऐसे नाम की भी चर्चा चल रही है जिसने अभी तक कोई आवेदन भी नहीं किया है फिर भी दावेदार ही कहते हैं कि यशोदा अस्पताल के सीएमडी डॉ. पीएन अरोड़ा का नाम प्रमुख चर्चा में है। जबकि डॉ. पीएन अरोड़ा ने युग करवट से बातचीत करते हुए कहा था कि वह या उनके परिवार का कोई सदस्य मेयर का चुनाव नहीं लड़ेगा, फिर भी उनका नाम बीच-बीच में जरूर आ ही जाता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल सबसे प्रमुखता से जो नाम चल रहे हैं उसमें मयंक गोयल, अशोक मोंगा, ललित जायसवाल, संजीव शर्मा, संजीव गुप्ता, वेद प्रकाश गर्ग, अनिल स्वामी, अनिल अग्रवाल (सांवरिया), सरदार एसपी सिंह, जगदीश साधना सहित कई नाम हैं। सभी के अपने-अपने दावे हैं। मयंक गोयल, अशोक मोंगा, संजीव गुप्ता, ललित जायसवाल की पैरवी दिल्ली के दो बड़े नेता कर रहे हैं। उनकी पैरवी बहुत मजबूती से हो रही है और सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इन नामों में से किसी के नाम पर मुहर लग सकती है, बाकी तो खुद नेता का भाग्य ही होता है।
वहीं महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की भी मजबूत पैरवी विधायक अतुल गर्ग, विधायक अजीतपाल त्यागी, विधायक सुनील शर्मा, विधायक नंदकिशोर गुर्जर, सांसद राज्यसभा अनिल अग्रवाल, प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप कर रहे हैं। इतने जनप्रतिनिधि संजीव शर्मा की पैरवी कर रहे हैं। हालांकि अब पुरानी भाजपा नहीं है। अब ये आज की भाजपा है, पता नहीं कौन कहां से आ जाए और किसकी लॉटरी खुल जाए। वैसे दिल्ली के एक बड़े नेता के आशीर्वाद के बिना कुछ नहीं है। इन बड़े नेता की छवि काफी अच्छी है और उनकी एक अलग पहचान है। यदि वह दिल से जिसकी मदद कर देंगे तो टिकट उसको मिल सकता है। बाकी तो एक प्रक्रिया है और उस प्रक्रिया में जो सही बैठेगा उसकी ही लॉटरी खुलेगी। बरहाल कभी-कभी ऐसा भी होता है जिनके नाम चलते हैं उनका नंबर नहीं आता और अन्य चेहरा सामने आ जाता है। फिलहाल ऐसी संभावना कम दिखाई दे रही है, लेकिन दिल्ली के बड़े नेता के आशीर्वाद की सभी को जरूरत है, उनका आशीर्वाद बेहद जरूरी है।