प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम बोर्ड की आज हुई बैठक काफी हंगामेदार हुई। 11 बजे नगर निगम बोर्ड की बैठक शुरू हुई इसके बाद नवनिर्वाचित पार्षद कुसुम सिंह को मेयर ने गुलाब का फूल देकर उनका सम्मान किया। नगर निगम बोर्ड की बैठक जैसे ही शुरू हुई विवाद भी शुरू हो गया। विवाद सबसे पहले 7.6.2022 को हुई बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव की पुष्टि को लेकर शुरू हुआ। इस मामले को सबसे पहले पार्षद राजेंद्र त्यागी ने उठाया। पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना था की स्मार्ट पार्किंग, दुकानों का किराया बढ़ाने और टैक्स में वृद्धि करने का प्रस्ताव की पुष्टि नहीं हुई तो फिर उससे पहले नगर निगम प्रशासन ने शासन की अनुमति के लिए क्यों भेज दिया। इसका जवाब उन्होंने मेयर के माध्यम से नगर आयुक्त से जाना। इसके बाद पार्षद अनिल स्वामी ने भी मामला उठाया। उन्होंने कहा कि जो भी प्रस्ताव पुष्टि के लिए आया है। उसमें सर्वसम्मति शब्द का यूज किया गया है। जबकि यह शब्द यूज करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि कोई भी प्रस्ताव पास करते समय बहुमत शब्द का यूज किया जा सकता है। पार्षद मनोज चौधरी का कहना था कि सफाई का व्यवस्था को प्राइवेट हाथों में दे दिया गया है। इससे सफाई व्यवस्था चौपट हो गई है। निगम पार्षद जाकिर अली सैफी ने कहा कि पूर्व में प्रस्ताव पास हो चुका है कि प्रत्येक वार्ड में 60 लाख के विकास कार्य होंगे तो फिर विकास कार्य क्यों नहीं हुए हैं यह सदन का अपमान है।
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस दौरान सदन में उठे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि शासन ने निगम बोर्ड में गिरे प्रस्ताव के संबंध में अनुमति मांगी है। प्रशासनिक अधिकार के तहत शासन को भेजा गया। पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि ऐसा नहीं है। नगर निगम अधिनियम में ऐसी व्यवस्था है कि शासन भी अगर कोई निर्देश जारी करेगा तो भी उसे कार्यकारिणी या बोर्ड में पहले रखा जाएगा इसके बाद अमल में लाया जाएगा। शासन के निर्देश को नगर निगम मानने के लिए बाध्य नहीं है। दूसरी ओर ठेके पर रखे गए ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि वह पिछले 30 साल से निगम में ठेके पर नौकरी कर रहे हैं। मगर अब काम प्राइवेट कंपनी को दिए जाने से उनके नौकरी चली गई है। उन्होंने जो भी पार्षद सदन में आए उनको फूल देकर अपना विरोध जताया।