युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। हाउस टैक्स को लेकर निगम की टेंशन बढ़ती जा रही है। नगर निगम जिस एक्ट की धारा 207 और 213 के तहत हाउस टैक्स के नोटिस जारी कर रहा है उन्हें इस धारा के तहत नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है। एक्ट की धारा 207 में नगर निगम को प्रत्येक घर में सेल्फ असेस्मेंट के फार्म वितरण करने का अधिकार है। जबकि निगम हाउस टैक्स के नोटिस वितरण कर रहा है। तो इस एक्ट की धारा में प्रावधान तक नहीं है।
वहीं एक्ट की धारा 213 के तहत जनता से मिली शिकायतों के निस्तारण का अधिकार है। मगर निगम लोगों को गलत नोटिस थमाने में लगा है। बीजेपी पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि नगर निगम आम जनता को नोटिस में दिए गए एक्ट की धार 207 और 213 की गलत व्याख्या कर जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है।
निगम के अधिकारी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं है। निगम के मुख्यकर निर्धारण अधिकारी डॉ0 संजीव सिन्हा ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी और निगम के नोटिसों को लेकर आम जनता के साथ पार्षदों में रोष व्याप्त है। निगम के पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि गलत नोटिस वितरण को लेकर अगर निगम प्रशासन फौरी कदम नहीं उठाता है तो वह इस मामले में कोर्ट जाएंगे। उनका कहना है कि गाजियाबाद नगर निगम में वर्ष 2005 से सेल्फ असेस्मेंट स्कीम लागू है। इसके तहत आम आदमी खुद अपनी प्रॉपर्टी पर टैक्स लगाने के लिए फार्म भरकर देगा। निगम उसको री-चेक मात्र कर सकता है। गड़बड़ी मिली तो उसमें सुधार कर सकता है। मगर नोटिस नहीं दे सकता है।