मास्टरी से दंगल और दंगल से राजनीतिक मैदान का वो नायाब हीरा जिसे धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव कहा जाता था, आज लाखों आंखे नम करके हमारे बीच से शारीरिक रूप से तो भले चला गया, लेकिन उनके आदर्श, यादें और राजनीति में जो लकीर खींची है वो शायद ही कोई पार कर पायेगा। दबे कुचलों और अल्पसंख्यकों की एक ऐसी आवाज जो हमेशा गूंजती थी, अब वो हमेशा के लिए खामोश हो गई। जो नेता कार्यकर्ताओं के दिलों में धडक़ता था, कार्यकर्ताओं की वो राजनीतिक धडक़न अब हमेशा के लिए बंद हो गई। एक ऐसा नेता जो भारी भीड़ में भी अपने कार्यकर्ताओं को नाम से पुकारता था अब वो आवाज भी हमेशा के लिए बंद हो गई। धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव के शोक में केवल समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि देशभर की राजनीतिक पार्टियों के नेता डूबे हैं। जाहिर है बहुत ही कम नेता इस दुनिया में मुलायम सिंह यादव की तरह होंगे। जो आम लोगों के साथ कार्यकर्ताओं के भी दिलों में राज करते थे। मौत अटल सत्य है, सभी को इस दुनिया से जाना है। एक शायर का ये शेर बिल्कुल सटीक बैठता है…
‘‘मौत उसकी है, करे जिसका जमाना अफसोस
यूं तो दुनिया में सभी आए हैं जाने के लिए’’
बहरहाल जब साइकिल से चलकर दंगल और मास्टरी करने वाला सैफई का एक छोटे कद और मजबूत देह वाला व्यक्ति सूबे की राजनीति में एक बड़ा प्रतिमान बनकर उभरा तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ये दंगल का पहलवान राजनीति के दंगल में अच्छों-अच्छों को पटखनी दे देगा। रक्षामंत्री रहते हुए शहीदों के शवों को वापस अंतिम संस्कार के लिए घरों तक लाना, फूलन देवी जैसी दस्यु को राजनीति में एक आवाज बनाना, धार्मिक कट्टरता को लगातार चुनौती देना और ललकारना, लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों की सुध लेना, उनके इलाज, उनके मंच, उनके आश्रय के लिए व्यवस्थाएं करना मुलायम को दरियादिल और मजबूत नेता बनाकर सामने पेश करता रहा। नि:संदेह, राजनीति में मुलायम होना एक कमाल की उपलब्धि है। युग करवट परिवार की ओर से मुलायम सिंह यादव को भावभीनी श्रद्घांजलि…।