युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। अपनी मांगों को लेकर जिले के एंबुलेंस चालकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। एंबुलेंस चालकों ने अपनी मांगें पूरी हुए बिना काम पर वापस लौटने से इंकार कर दिया है।
जिले में एएलएस, १०२ और १०८ की ३८ एंबुलेंस चल रही हैं जिस पर ७० से अधिक चालक और मेडिकल सहायक तैनात हैं। एंबुलेंस चालकों का कहना है कि नई कंपनी पुराने स्टाफ को हटाकर नया स्टाफ भर्ती कर रही है जबकि पुराने स्टाफ की सेवा जारी रखने के लिए २० हजार रुपये का डीडी मांगा जा रहा है, वेतन भी कम किया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष बृजमोहन ने बताया कि कोरोना के दौर में एंबुलेंस चालकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य किया था लेकिन अब उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है। इसके विरोध में एंबुलेंस कर्मी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मियों की मांग है कि कंपनी बदलने पर कर्मचारियों को बदला ना जाए, अनुभवी कर्मचारियों को ही रखा जाए। कोरोना महामारी के दौरान अग्रणी भूमिका निभा रहे कोरोना योद्धाओं के लिए एंबुलेंस कर्मचारियों को स्थाई किया जाए। कोरोना से मरने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को पांच लाख रुपए का बीमा और राष्टï्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधीन कर महंगाई भत्ता और अतिरिक्त समय का वेतन दिया जाए। एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल जाने की मशक्कत करनी पड़ी। महज चार एंबुलेंस ही हड़ताल के दौरान संचालित थीं। प्रदेश स्तर पर चल रही इस हड़ताल के कारण सबसे अधिक मरीज प्रभावित हो रहे हैं। कर्मियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगें तक सुनने को तैयार नहीं है। ऐसे में हड़ताल जारी रहेगी।