नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। इन दिनों उत्तर प्रदेश में शीतकालीन सत्र चल रहा है। सत्र के दौरान विधान परिषद सदस्य दिनेश गोयल और विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने प्रशासनिक अधिकारियों से जुडे भ्रष्टïाचार और महिला अपराध के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष न्यायालय स्थापित किए जाने का मुद्दा उठाया।
एमएलसी ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्ष २०१७ में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि सांसदों, विधायकों से जुडे आपराधिक, भ्रष्टïाचार व अन्य मामलों से संबंधित वादों की जल्द सुनवाई के निस्तारण के निए विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाए। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर लम्बित ऐसे मामलों के वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए कोई दिशा निर्देश या सुनिश्चित व्यवस्था न होने के कारण इस संवर्गों के प्रकरण का सही से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। एमएलसी ने इस मामले को रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में कई ऐसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी है जो भ्रष्टïाचार और महिला उत्पीडन के मामलों में लिप्त पाए गए हैं या आरोपित किए गए हैं।
ऐसे अधिकारियों के विरूद्घ केवल जांच की कार्रवाई की जाती रही, कई अधिकारियों पर जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई, और जब कार्रवाई की स्थिति बनी तो वो या तो रिटायर्ड हो गए या ऊंची पहुंच के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। जबकि सांसदों और विधायकों पर कानूनी कार्रवाई उनकी सदन की सदस्यता समाप्त होने के बाद भी विरूद्घ की गई। राजनीति में अपराधीकरण और भ्रष्टïाचार को रोकने सम्बंधी कई वैधानिक उपाए किए लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ऐसा कुछ नहीं है। ऐसे में दोनों एमएलसी ने इन मामलों में सुनिश्चित व्यवस्था बनाए जाने की मांग की है।