युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम ने गत दिनों तीन वर्ष या इससे अधिक समय से एक ही सीट पर जमे बाबुओं का नगर आयुक्त ने तबादला कर दिया। इसी तरह से निगम ने राजस्व निरीक्षकों का भी तबादला कर दिया। दोनों ही संवर्ग पर तैनात कर्मचारियों की कुल संख्या 82 है। गत दिनों प्रदेश के नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। नगर आयुक्त ने इस मामले में निर्देश का पालन करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मगर नगर निगम में अभी भी बड़ी संख्या में कार्यवाहक बाबू सीट पर जमे हुए है। इन पर कब और कौन कार्रवाई करेगा यह तय नहीं है। निगम में लंबे समय से बाबुओं का तबादला नहीं होना एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इससे पहले भी कई ऐसे बाबू है जो पिछले दस वर्ष तक एक ही सीट पर कार्य करते रहे। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस बार सभी 50 बाबुओं और 30 राजस्व निरीक्षकों का तबादला कर दिया। यह एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
वहीं दूसरी और नगर निगम में करीब 30 के आसपास ऐसे बाबू है जिन्हें कार्यवाहक बाबू बोला जाता है। यह ऐसे बाबू बने है जो पहले किसी पद पर कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे थे। इनमें सफाई कर्मी, पंप ऑपरेटर्स आदि शामिल है। कार्यवाहक बाबू बाबुओं की कमी को देखते हुए बनाया गया है। यानि इन कर्मचारियों को उनके मूल पद से बड़े पदों पर तैनात कर कार्यवाहक बाबू बनाया गया है। निगम में ऐसे कार्यवाहक बाबुओं की संख्या 30 बताई जाती है। इनमें से कई तो ऐसे है तो पिछले दस वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए है। ऐसे बाबुओं का तबादला कब होगा अब इसका इंतजार हो रहा है। निगम के कई बाबु जिनका तबादला हो चुका है अब वह इनके तबादले की मांग कर रहे है। उनका कहना है कि तीन वर्ष से एक सीट पर जमे बाबुओं का तबादला हो सकता है तो फिर निगम में कार्यवाहक बाबू जो दस वर्षों से एक ही सीट पर जमे है उनका तबादला भी नगर आयुक्त को करना चाहिए।