युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। लोनी की मंडोला विहार योजना से प्रभावित किसानों द्वारा आमरण अनशन के साथ समाधि लेने की चेतावनी का कोई हल नहीं निकला। इसके बाद आज कई किसान जमीन खोदकर उसमें बैठ गए। किसानों ने इसे समाधि का नाम दिया है। दोपहर बाद तक उनका समाधि लेने का सिलसिला लगातार जारी है। समाचार लिखे जाने तक किसान नेता मनवीर तेवतिया समेत डेढ़ दर्जन से भी अधिक किसान जिंदा समाधि ले चुके थे। इस दौरान कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच सका था। मंडोला विहार योजना के प्रभावित किसानों ने अपनी मांगें नहीं माने जाने पर 15 सितंबर के दिन जिंदा समाधि लेने की चेतावनी दी थी। इस घोषणा के बाद से ही प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। जिसके चलते उप जिला अधिकारी लोनी शुभांगी शुक्ला, पुलिस क्षेत्राधिकारी अतुल कुमार सोनकर व आवास विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता ने सोमवार के दिन किसानों के बीच पहुंचकर उनके द्वारा आमरण अनशन के साथ समाधि में बैठने के निर्णय को स्थगित करने का प्रयास किया था।
इस दौरान किसान नेता मनवीर तेवतिया ने उपजिला अधिकारी से कहा था कि वार्ता के लिए आज का ही समय प्रशासनिक अधिकारियों के पास है, समाधान करा सकते हैं तो करा दे। इस पर उपजिला अधिकारी ने आनन-फानन में एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास के साथ किसान प्रतिनिधियों की वार्ता कराई गई थी। यह वार्ता मोहननगर पुलिस चौकी पर कराई थी मगर इसके बावजूद कोई संतोषजनक समाधान नही हो सका था। इसके बाद योजना से प्रभावित किसानों ने अपने निर्णय पर अटल रहते हुए अपनी पूर्व घोषणानुसार बुधवार को (आज) जिंदा समाधि लेने की बात कही थी। जिनका सुबह लगभग 10 से समाधि लेने का क्रम लगातार जारी है। खबर लिखे जाने तक 17 किसानों ने समाधि ले ली थी। आवास विकास परिषद ने लोनी इलाके में मंडोला, नानू, पंचलोक (मकसूदाबाद बामला) लुतफुल्लापुर नवादा, अगरोला, मिलक बामला यानी 6 गांवों की 2614 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। शुरू से ही यहां के किसान उचित मुआवजे की मांग को लेकर लगातार धरना प्रदर्शन करते चले आ रहे हैं। पिछले 5 सालों से कई बार शासन प्रशासन के अधिकारियों से इस बारे में वार्ता भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक भी कोई नतीजा नहीं निकला है। किसानों का आरोप है कि पहले भाजपा सरकार ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया।