समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने राजनीति का ककहरा चौधरी चरण सिंह के बताए रास्ते पर चलकर ही सीखा था। ताउम्र वह खुद को चौधरी चरण सिंह का कट्टर अनुयायी ही बताते आए। शाद उनको आभास भी नहीं रहा होगा कि उनके इस दुनिया चले जाने के बाद उनको पुत्र अखिलेश यादव बड़े चौधरी को भुला देंगे। दरअसल आज गाजियाबाद के कौशांबी में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेसवार्ता की थी। प्रेसवार्ता स्थल पर एक बैनर लगाया गया था जिस पर पहली पंक्ति में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, सोनिया गांधी, डाक्टर भीमराव अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, मुलायम सिंह यादव के फोटो लगाए थे। नीचे की लाइन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के चित्रों को स्थान दिया गया था। लोगों को हैरानी इस बात की थी इस बैनर पर चौधरी चरण सिंह का चित्र नहीं था। हाल ही में केन्द्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया था। तब तक रालोद और सपा एक ही गठबंधन में थे। चौधरी साहब को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद जयंत चौधरी ने भाजपा से गठबंधन कर लिया और एनडीए का हिस्सा हो गए। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्योंकि अब जयंत भाजपा के साथ हैं इसलिए भी बड़े चौधरी के फोटो को जगह ना दी गई हो। अगर ऐसा भी है तो भी गलत है। क्योंकि कम से कम पश्चिम यूपी में तो चौधरी चरण सिंह का वह स्थान है जिसे हर राजनीतिक दल बड़ा सम्मान देता आया है। चौधरी साहब को किसी दल, जाति या वर्ग की सीमाओं में बांधा ही नहीं जा सकता। बड़ा सवाल यह भी है क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी की नजर में अब चौधरी साहब पराए हो चुके हैं? क्या सपा और कांग्रेस ने मान लिया है कि अब बड़े चौधरी की विरासत पर भाजपा का अधिकार है?