युग करवट ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव तय समय पर ही कराने की तैयारी सरकार कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि अक्टूबर में आचार संहिता लागू की जा सकती है। उसके बाद नवंबर के दूसरे पखवाड़े में चुनाव कराया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो रहा है। सरकार की मंशा उससे पहले ही चुनाव कराने की है। चुनाव आयोग और शासन दोनों अपने-अपने स्तर पर इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक दलों ने भी चुनाव की तैयारी शुरु कर दी है।
शहरी क्षेत्र के निकाय चुनाव को 2024 का सेमीफाइल भी माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद सीधे लोकसभा का चुनाव होना है। 2017 के निकाय चुनावों में भाजपा 16 नगर निगम में से 14 में अपना मेयर बनाने में कामयाब रही थी जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक बेहतर नहीं रहा था। ऐसे में भाजपा इस बार के निकाय चुनाव में किसी तरह की कोई गुंजाइश नहीं छोडऩा चाहती है। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी पहले ही साफ कर चुकी है कि पार्टी मंत्री, सांसद और विधायकों के परिजनों को टिकट नहीं देगी। ऐसे में निकाय चुनाव में बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं को टिकट देने का खाका तैयार कर रही है।
राष्टï्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी भी अपने-अपने स्तर पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। विधानसभा चुनाव में दोनों दलों में गठबंधन था, लेकिन नगर निगम चुनाव दोनों अलग-अलग लड़ेंगे।
उधर बहुजन समाज पार्टी ने भी नगर निगम चुनाव की तैयारी शुरु कर दी है। बसपा उन नेताओं को प्रत्याशी बनायेगी जो पार्टी के सर्वाधिक सदस्य बना सकेंगे। विधानसभावार नेताओं को सदस्य बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। नगर निगमों में तो भाजपा मजबूत है। वहां हर दल को भाजपा से ही संघर्ष करना पड़ेगा, लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव में भाजपा को संघर्ष करना पड़ सकता है। कई मोर्चों पर हो रहा भाजपा का विरोध भी इसका बड़ा कारण है।