गाजियाबाद (युग करवट)। ‘अति का भला ना बोलना, अति की भलि ना चुप, अति का भला ना बरसना, अति की भलि ना धूप’ वाली कहावत खुद को सत्तारूढ़ पार्टी का कदï्दावर नेता बताने वाले डॉ. अरविंद कुमार वत्स अकेला के ऊपर पूरी तरह से सटीक बैठती हुई दिखाई दे रही है। उन्होंने समाज में अपना रुतबा बढ़ाने के लिए न केवल तन से सर जुदा करने वाली धमकी का ताना बाना बुनकर पुलिस प्रशासन को हडक़ंपित कर दिया, बल्कि समाज में भी सनसनी फैला दी। कई दिनों के बाद जब पुलिस ने डॉ. अकेला को मिली कथित धमकी का चौकाने वाला खुलासा करके उनके गनर लेने वाले मंसूबों पर पानी फेर दिया तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों को ही कठघरे में लाने की कवायद शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने उनके ऊपर शिकंजा कसते उनके खिलाफ पुलिस को गुमराह करने और समाज में सनसनी फैलान व दूसरे धर्म के अनुयायीओं के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणीं करके सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाडऩे की कोशिश के दो मामलों में रिपोर्ट दर्ज करके उनके खिलाफ जांच भी शुरू कर दी। पुलिस के एक आला अधिकारी की माने तो प्राथमिक जांच के दौरान जो चौकानें वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं उनकी बिन्हा पर तो यह कहा जा सकता है कि उनके खिलाफ न केवल एक और रिपोर्ट दर्ज हो सकती है, बल्कि आने वाले समय में उनकी मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं।